कोरोना संघर्ष के खिलाफ सारी दुनिया एकजुट होकर लड़ाई लड़ रही है। जिन देशों को चिकित्सकीय सहायता की जरूरत है, वहां तमाम देश सामग्री पहुंचा रहे हैं। भारत इस समय कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा है। ऐसे में दुनिया के कई छोटे-बड़े देश उसे मदद पहुंचा रहे हैं। स्थानीयस्तर पर सरकारें लगातार अस्पतालों में व्यवस्थाएं बेहतर करने में लगी हैं। नए अस्पताल खोले जा रहे हैं। इस काम में औद्योगिक घराने और स्वयंसेवी संगठनों के अलावा व्यक्तिगत तौर पर भी लोग सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। आइए जानते हैं देश और दुनिया से कैसे मिल रही भारत को मदद...

नई दिल्ली. भारत इस समय कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा है। अप्रैल में जब कोरोना संक्रमण तेजी से फैलना शुरू हुआ था, तब देश की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई थीं। लेकिन अब स्थितियां धीरे-धीरे काबू में आती जा रही हैं। कोरोना संघर्ष के खिलाफ सारी दुनिया एकजुट होकर लड़ाई लड़ रही है। जिन देशों को चिकित्सकीय सहायता की जरूरत है, वहां तमाम देश सामग्री पहुंचा रहे हैं। स्थानीयस्तर पर सरकारें लगातार अस्पतालों में व्यवस्थाएं बेहतर करने में लगी हैं। नए अस्पताल खोले जा रहे हैं। इस काम में औद्योगिक घराने और स्वयंसेवी संगठनों के अलावा व्यक्तिगत तौर पर भी लोग सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। 

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आइए जानते हैं देश और दुनिया की मदद से कैसे बदल रहीं भारत की स्वास्थ्य सेवाएं...

महाराष्ट्र: नवाब मलिक ने कहा-महाराष्ट्र सरकार ने ऑक्सीजन उत्पादन के लिए एक नीति बनाई है। इसके तहत जो मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन के लिए राज्य में नए प्लांट लगाएगा, खासकर जहां प्लांट नहीं हैं, ऐसे प्लांट को हमने वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया है। वे जितना खर्च करेंगे पूरी तरह से सब्सिडी होगी।

महाराष्ट्र: मेयर किशोरी पेडनेकर ने बताया-हमारी महानगरपालिका दुनिया में पहली है, जो वैक्सीनेशन के लिए विदेशी कंपनी को ग्लोबल टेंडर करके बुला रही है। हम देश में दूसरे राज्य हैं जो ग्लोबल टेंडर कर रहे हैं।

हरियाणा: गृहमंत्री अनिल विज ने कहा-कोरोना के खिलाफ जो सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, वह है सभी को वैक्सीन देना। सभी को वैक्सीन मिल जाएं, इसके लिए हम ग्लोबल टेंडर जारी करने जा रहे हैं। दुनिया में हमें अगर कहीं से भी वैक्सीन मिल जाती है, तो हम हरियाणा के सभी लोगों को वैक्सीन लगा देंगे।

स्पुतनिक-V: कोविड वैक्सीन स्पुतनिक-V की दूसरी खेप कल भारत पहुंचेगी

ब्रिटेन: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि ब्रिटिश ऑक्सीजन कंपनी से 1200 ऑक्सीजन सिलेंडर की एक और खेप भारत पहुंच गई है।

अमेरिका: यहां के 57 सांसदों ने राष्ट्रपति जो बाइडेन को पत्र लिखकर भारत को कोविड सहायता बढ़ाने का अनुरोध किया है।

हरियाणा: करनाल के सिविल सर्जन योगेश शर्मा ने बताया कि हरियाणा रोडवेज की 5 मिनी बसों को एम्बुलेंस से परिवर्तित किया गया है।

दिल्ली: जर्मनी, ग्रीस और फिनलैंड द्वारा दी गई चिकित्सा सहायता लेकर जर्मनी से एक विमान दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचा।

इंडोनेशिया: यहां से 200 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भारत को भेज गए।

भारतीय वायुसेना की मदद: भारतीय नौसेना द्वारा शुरू किए गए कोविड राहत अभियान ‘समुद्र सेतु II’ के एक अंग के रूप में आईएनएस तरकश लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) से भरे हुए दो क्रायोजेनिक कंटेनर (प्रत्येक में 20 मीट्रिक टन) और 230 ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर 12 मई, 2021 को मुंबई पहुंचा। साथ ही कल तक महाराष्ट्र में 407 मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश में लगभग 1680 मीट्रिक टन, मध्य प्रदेश में 360 मीट्रिक टन, हरियाणा में 939 मीट्रिक टन, तेलंगाना में 123 मीट्रिक टन, राजस्थान में 40 मीट्रिक टन, कर्नाटक में 120 मीट्रिक टन और दिल्ली में 2404 मीट्रिक टन से अधिक ऑक्सीजन की आपूर्ति जा चुकी है। भारतीय वायुसेना के विमानों ने विभिन्न देशों के लिए 98 उड़ानें भरी हैं। इन उड़ानों वायु सेना द्वारा 793 मीट्रिक टन क्षमता के 95 कंटेनर और 204 मीट्रिक टन क्षमता के अन्य उपकरण लाए गए हैं। यह उपकरण सिंगापुर, दुबई, थाईलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, इंडोनेशिया, नीदरलैंड, ब्रिटेन, इजरायल और फ्रांस से लाए गए हैं।

पीएम केयर फंड से मदद: पीएम-केयर्स फंड से 322.5 करोड़ रुपए की लागत से 1,50,000 ऑक्सीकेयर सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई है। यह मरीजों के एसपीओ2 स्‍तरों के आंके गए माप के आधार पर उन्‍हें दी जा रही ऑक्सीजन को नियंत्रित रखने के लिए डीआरडीओ द्वारा विकसित की गई एक व्यापक प्रणाली है।

आक्सीजन एक्सप्रेस: झारखंड के टाटानगर से 120 मीट्रिक टन ऑक्सीजन लेकर उत्तराखंड में कल रात पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस पहुंची। पुणे में भी कल देर रात पहुंची पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने 55 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की। यह आपूर्ति ओडिशा के अंगुल से की गई।

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