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पाकिस्तान से उठी आवाज, शहीद-ए-आजम भगत सिंह को भारत-पाकिस्तान दें सर्वोच्च सम्मान, पाक में नाम पर हो सड़क

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पीर कलीम अहमद ने लाहौर में शादमान चौक का नाम सिंह के नाम पर रखने की फाउंडेशन की मांग को दोहराया। फाउंडेशन ने मांग की कि नए ब्रिटिश राजा चार्ल्स III को पाकिस्तान-भारत और तीन क्रांतिकारियों के परिवारों से माफी मांगनी चाहिए और उन्हें एक बड़ा मुआवजा देना चाहिए।

Pakistan people demands highest civilian award to Shaheed Bhagat Singh, Roads on name of revolutionary leader, DVG
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First Published Sep 29, 2022, 9:43 PM IST

Shaheed-E-Azam Bhagat Singh: भारत-पाकिस्तान के बीच बंटवारे की लाइन भले ही खिंच गई है लेकिन दोनों देशों में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के प्रति सम्मान एक रत्ती भी कम नहीं है। भारत के बाद अब पाकिस्तान से भी शहीद-ए-आजम को देश का सर्वोच्च सम्मान देने की मांग की गई है। पाकिस्तान की एक नागरिक संस्था ने भारत और पाकिस्तान दोनों से अनुरोध किया है कि शहीद भगत सिंह को सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करें। वह दोनों देशों के सबसे क्रांतिकारी नेता रहे हैं। लाहौर हाईकोर्ट परिसर में भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने शहीद-ए-आजम की जयंती मनाई। फाउंडेशन ने शहीद-ए-आजम के अलावा सुखदेव, राजगुरु को भी नमन किया। 

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से गुहार

फाउंडेशन के चेयरमैन इम्तियाज रशीद कुरैशी ने कहा कि हम लोग अपने शहीदों के शुक्रगुजार हैं। शहीद-ए-आजम भगत सिंह को भारत व पाकिस्तान दोनों समान रूप से सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित करे। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ वह लोग संस्था के द्वारा आग्रह कर रहे कि शहीद भगत सिंह को उपमहाद्वीप के लोगों के लिए उनकी बहादुरी और बलिदान के सम्मान में सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित करें।

पाकिस्तान सरकार उनके सम्मान में डाक टिकट करे जारी

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पीर कलीम अहमद ने लाहौर में शादमान चौक का नाम सिंह के नाम पर रखने की फाउंडेशन की मांग को दोहराया। फाउंडेशन ने मांग की कि नए ब्रिटिश राजा चार्ल्स III को पाकिस्तान-भारत और तीन क्रांतिकारियों के परिवारों से माफी मांगनी चाहिए और उन्हें एक बड़ा मुआवजा देना चाहिए। इसके अलावा यह भी मांग की कि पाकिस्तानी सरकार सरकार भगत सिंह को सम्मानित करने के लिए स्मारक टिकट और सिक्के जारी करे। पाकिस्तान में एक प्रमुख सड़क का नाम भी उनके नाम पर रखा जाना चाहिए। उनकी वीरता की कहानियां नई पीढ़ी को पढ़ाई जाए। पाठ्यक्रम में उनके साहस और बहादुरी के पाठों को शामिल किया जाना चाहिए। 23 मार्च, 1913 को ब्रिटिश शासकों द्वारा सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी दी गई थी।

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