राज्यसभा में शुक्रवार को, संसद पर 2001 में हुए आतंकी हमले की 18वीं बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और आतंकवाद का पूरी दृढ़ता के साथ मुकाबला करने का संकल्प दोहराया गया

नई दिल्ली: राज्यसभा में शुक्रवार को, संसद पर 2001 में हुए आतंकी हमले की 18वीं बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और आतंकवाद का पूरी दृढ़ता के साथ मुकाबला करने का संकल्प दोहराया गया। सदन की बैठक शुरू होने से पहले शहीदों की स्मृति में कुछ पलों का मौन रखा गया। सभापति एम वेंकैया नायडू ने संसद पर 13 दिसंबर 2001 को हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवादियों द्वारा की गई अंधाधुंध गोलीबारी में नौ लोगों की जान चली गई थी।

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सभापति ने कहा कि सुरक्षा बलों के सर्वोच्च बलिदान को याद करने के साथ साथ हम यह संकल्प दोहराते हैं कि आतंकवाद को किसी भी कीमत पर, किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आतंकवाद का पूरी दृढ़ता के साथ मुकाबला किया जाएगा। इसके बाद सदन में शहीदों की स्मृति में कुछ पलों का मौन रखा गया।

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हमले में 14 लोगों की मौत

यह हमले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने किए थे। इस हमले में 14 लोगों की मौत हो गई थी। जिसमें दिल्ली पुलिस के पांच कर्मी, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की एक महिला अधिकारी, संसद भवन के दो वॉच और वार्ड कर्मचारी, एक माली और एक कैमरामैन शामिल थे।

जिस समय यह घटना घटी उस समय संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा था और कार्यवाही 40 मिनट के लिए स्थगित हुई थी। संसद के अंदर लगभग 100 सदस्य मौजूद थे। तत्कालीन गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी और रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज अन्य मंत्रियों के साथ लोकसभा में मौजूद थे।

उल्लेखनीय है कि 18 साल पहले आज ही के दिन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के आतंकवादियों ने संसद पर हमला करते हुए गोलीबारी की थी जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में ये आतंकवादी मारे गए थे।

(फाइल फोटो)