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Spyware Pegasus: सरकार ने जासूसी के दावे को किया खारिज, कहा- यह भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने की कोशिश

द वॉशिंगटन पोस्ट ने दुनियाभर के 16 अन्य मीडिया सहयोगियों के साथ मिलकर 'द पेगासस प्रोजेक्ट' नाम से जांच रिपोर्ट जारी की है। इस जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्राइवेट इज़राइली सॉफ्टवेयर पेगासस का इस्तेमाल फोन टैप करने में किया गया। 

Pegasus spyware: Indian government rejected the claims surrounding state-sponsored surveillance pwa
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New Delhi, First Published Jul 19, 2021, 10:38 AM IST
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नई दिल्ली. भारत सरकार ने उस दावे को खारिज किया है जिसमें कहा जा रहा है कि स्टेट प्रायोजित खास लोगों की निगरानी की जा रही है। सरकार ने कहा है कि इसका कोई ठोस आधार या इससे जुड़ा कोई सच नहीं है।

भारत में कुछ लोगों की फोन के द्वारा जासूसी करने के लिए इजरायली निगरानी फर्म एनएसओ समूह के स्पाइवेयर पेगासस (spyware Pegasus ) के उपयोग के संबंध में कई मीडिया आउटलेट्स रिपोर्ट पर सरकार ने कहा कि "रिपोर्ट भारतीय लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं को बदनाम करने के अनुमानों और अतिशयोक्ति पर आधारित एक मछली पकड़ने का अभियान लग रही है। 

50 हजार लोगों को फोन हुआ टैप
जांच के अनुसार, पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल कर करीब 50,000 लोगों के फोन को निशाना बनाया गया। जिन फ़ोन नंबरों को NSO समूह के डेटा का हिस्सा लीक किया गया था, उनमें सैकड़ों पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, विपक्षी राजनेता, सरकारी अधिकारियों और व्यावसायिक अधिकारियों  शामिल हैं।

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वाशिंगटन पोस्ट में छपी खबर का विरोध करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा- कहानी पूर्व-कल्पित निष्कर्षों में स्थापित है। आईटी मंत्रालय ने कहा, "उन रिपोर्टों का भी कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था और भारतीय सुप्रीम कोर्ट में व्हाट्सएप सहित सभी पक्षों द्वारा स्पष्ट रूप से इनकार किया गया था। 

सरकारी एजेंसियों के पास प्रोटोकॉल
सरकार ने कहा-  आईटी मंत्री ने संसद में कहा था कि सरकारी एजेंसियों द्वारा कोई कोई रोक नहीं लगाई गई है। सरकारी एजेंसियों के पास रोकने के लिए प्रोटोकॉल है, जिसमें केवल राष्ट्रीय हित में स्पष्ट रूप से बताए गए कारणों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों में उच्च रैंक वाले अधिकारियों से स्वीकृति शामिल है। भारत में, एक अच्छी तरह से स्थापित प्रक्रिया है जिसके माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक संचार वैध रोक राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्य से किया जाता है, विशेष रूप से किसी भी सार्वजनिक आपात स्थिति के मामले में या सार्वजनिक सुरक्षा के हित में, केंद्र में एजेंसियों द्वारा और राज्य के द्वारा। इलेक्ट्रॉनिक संचार के इन वैध अवरोधों के लिए भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 की धारा 5 (2) और सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2000 की धारा 69 के प्रावधानों के तहत प्रासंगिक नियमों के अनुसार किया जाता है। 

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरसेप्शन, मॉनिटरिंग और डिक्रिप्शन के प्रत्येक मामले को केंद्रीय गृह सचिव द्वारा अनुमोदित किया जाता है। राज्य सरकारों में सक्षम प्राधिकारी के पास आईटी (प्रक्रिया और सूचना के अवरोधन, निगरानी और डिक्रिप्शन के लिए सुरक्षा) नियम, 2009 के अनुसार ये शक्तियां भी हैं। सरकार ने कहा, "इसलिए, प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से किसी भी जानकारी का अवरोधन, निगरानी या डिक्रिप्शन कानून की उचित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है।"

क्या है मामला
दरअसल, द वॉशिंगटन पोस्ट ने दुनियाभर के 16 अन्य मीडिया सहयोगियों के साथ मिलकर 'द पेगासस प्रोजेक्ट' नाम से जांच रिपोर्ट जारी की है। इस जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्राइवेट इज़राइली सॉफ्टवेयर पेगासस का इस्तेमाल फोन टैप करने में किया गया। 

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