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EEF की बैठक में VC के जरिये मोदी ने पुतिन के विजन को सराहा-'भारत और रूस की दोस्ती कोरोनाकाल में भी खरी उतरी'

रूस में आयोजित छठवें पूर्वी आर्थिक मंच(इस्टर्न इक्नामिक फोरम-EEF) में भारत के अलावा चीन, अर्जेंटीना और थाइलैंड के नेता शामिल हुए हैं।

PM Modi addressed to plenary session of Eastern Economic Forum (EEF)
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New Delhi, First Published Sep 3, 2021, 1:44 PM IST
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मॉस्को. इकोनॉमिक गतिविधियों को बढ़ावा देने शुक्रवार से रूस में छठवें पूर्वी आर्थिक मंच(इस्टर्न इक्नामिक फोरम-EEF) की बैठक शुरू हुई। इस बैठक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जुड़े। बैठक में भारत के अलावा चीन, अर्जेंटीना और थाइलैंड जैसे देशों के नेता भी शामिल हुए हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन, कजाखस्तान और मंगालिया के राष्ट्रपति भी इसमें शामिल हुए हैं। हालांकि बैठक में शामिल होने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री( Petroleum & Natural Gas) हरदीप सिंह पुरी रूस में हैं।

रूस की तारीफ में बोले मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा-मेरे नजर में व्लादिवोस्तोक वास्तव में यूरेशिया और प्रशांत का 'संगम' है। मैं रूसी सुदूर पूर्व के विकास के लिए राष्ट्रपति पुतिन के दृष्टिकोण की सराहना करता हूं। इस विज़न को साकार करने में भारत रूस का एक विश्वसनीय भागीदार होगा। मुझे ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए खुशी हो रही है और इस सम्मान के लिए राष्ट्रपति पुतिन को धन्यवाद देता हूं। भारतीय इतिहास और सभ्यता में 'संगम' का एक विशेष अर्थ है। इसका अर्थ नदियों/लोगों/विचारों का संगम या एक साथ आना है।

भारत और रूस की दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी
 मोदी ने रूस और भारत की दोस्ती की मिसाल देते हुए कहा-भारत और रूस के बीच दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी है। हाल ही में इसे कोरोना महामारी के दौरान हमारे मजबूत सहयोग में देखा गया, जिसमें वैक्सीन का क्षेत्र भी शामिल है। महामारी ने हमारे द्विपक्षीय सहयोग में स्वास्थ्य और फार्मा क्षेत्रों के महत्व को उजागर किया है।

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2015 होती आ रही है ये मीटिंग
यह मीटिंग 2015 से हर साल होती आ रही है। हालांकि पिछले साल इसे कोरोना के चलते रद्द करना पड़ गया था। इस साल यह 2-4 सितंबर तक व्लादिवोस्तोक में सुदूर पूर्वी संघीय विश्वविद्यालय परिसर में हो रही है। इसमें दूसरे देशों के नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जुड़े हैं। इस का मकसद व्यापार संबंधों को विकसित करने और निवेशकों को आकर्षित करना है। इस मीटिंग में 51 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 3000 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए हैं। इस बार का विषय विश्व परिवर्तन में फार ईस्ट के लिए अवसर है। 

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