प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 12 जनवरी को सुबह 10:30 बजे दूसरे राष्ट्रीय युवा संसद महोत्‍सव के कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। पीएम इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होंगे। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक शामिल होंगे। 

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 12 जनवरी को सुबह 10:30 बजे दूसरे राष्ट्रीय युवा संसद महोत्‍सव के कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। पीएम इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होंगे। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक शामिल होंगे। 

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राष्ट्रीय युवा संसद महोत्‍सव का उद्देश्य 18 से 25 साल के बीच के युवाओं के विचारों को सुनना है जो मतदान करने का अधिकार रखते हैं और आने वाले वर्षों में सार्वजनिक सेवाओं सहित विभिन्न सेवाओं में शामिल होंगे। पीएम मोदी ने 2017 में मन की बात कार्यक्रम के दौरान इसकी अवधारणा के विचार रखे थे। 

पहले राष्ट्रीय युवा संसद में 88,000 युवाओं ने लिया था हिस्सा
12 जनवरी से 27 फरवरी 2019 को पहली राष्ट्रीय युवा संसद को आयोजित किया गया था। इसमें 88,000 युवाओं ने हिस्सा लिया था। इसका विषय 'भारत की नई आवाज बनें और नीति के लिए समाधान एवं योगदान खोजें' था। 

दूसरा राष्ट्रीय युवा संसद वर्चुअल तरीके से आयोजित किया जा रहा है। 23 दिसंबर, 2020 को इसे आयोजित किया गया। इसमें 2.34 लाख युवाओं ने हिस्सा लिया। इसके बाद 1 से 5 जनवरी, 2021 तक वर्चुअल माध्यम से राज्य युवा संसदों द्वारा इसका अनुसरण किया गया। इसका फाइनल 11 जनवरी को संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित किया जाएगा। 29 राष्ट्रीय विजेताओं को राष्ट्रीय ज्यूरी के समक्ष अपने विचार प्रकट करने का अवसर मिलेगा। 

ज्‍यूरी में रूपा गांगुली, प्रवेश साहिब सिंह, और श्री प्रफुल्ल केतकर शामिल हैं। शीर्ष तीन विजेताओं को प्रधानमंत्री के समक्ष 12 जनवरी को होने वाले समापन समारोह में अपने विचार व्‍यक्‍त करने का मौका मिलेगा।

राष्ट्रीय युवा महोत्सव
राष्ट्रीय युवा महोत्सव का आयोजन हर साल 12 से 16 जनवरी को किया जाता है। 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती है, जिसे राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रीय युवा महोत्सव का उद्देश्य देश के युवाओं को अपनी प्रतिभा का परिचय देने के लिए एक साथ एक मंच पर लाना है; जहां एक लघु भारत का निर्माण करते हुए युवा औपचारिक और अनौपचारिक रूप से अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक विशिष्टता पर विचारों का आदान-प्रदान करते हैं।