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शोक सभा: मोदी ने कहा- सुषमा भले ही मुझसे छोटी थीं, लेकिन उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता था

 सुषमा स्वराज के निधन के बाद मंगलवार को दिल्ली में शोकसभा रखी गई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरलीमनोहर जोशी समेत कई नेता शामिल हुए। 

PM Narendra Modi at the condolence meet for late former Union Minister, BJP leader Sushma Swaraj in Delhi
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New Delhi, First Published Aug 13, 2019, 7:18 PM IST
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नई दिल्ली.  सुषमा स्वराज के निधन के बाद मंगलवार को दिल्ली में शोकसभा रखी गई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरलीमनोहर जोशी समेत कई नेता शामिल हुए। इस दौरान मोदी ने कहा, ''सुषमाजी उम्र में भले ही मुझसे छोटी थीं, लेकिन सार्वजनिक तौर पर कहना चाहूंगा कि मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता था। वे शारीरिक दिक्कतों से जूझती थीं, फिर भी जिम्मेदारियां निभाती थीं।

प्रधानमंत्री ने कहा, वे कृष्ण भक्ति को समर्पित थीं। उनके मनमंदिर में कृष्ण बसे थे। वे मुझसे जय श्री कृष्ण कहती थीं और मैं उन्हें जय द्वारकाधीश कहता था। कर्मण्ये वाधिकारस्ते क्या होता है, यह सुषमाजी ने अपने जीवन में दिखाया था। सुषमा स्वराज का निधन 6 अगस्त को हो गया था। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। जहां उन्होंने आखिरी सांस ली थी।

सुषमाजी का भाषण प्रभावी और मारक होता था- मोदी
मोदी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उन्होंने मिसाल पेश की। सुषमाजी का भाषण प्रभावी होता था, केवल इतना ही नहीं है। उनका भाषण प्रेरक भी होता था। उनके व्यक्तित्व में विचारों की गहराई का अनुभव हो कोई करता था। अभिव्यक्ति की ऊंचाई हर पल नए मानक पार करती थी। दोनों में से एक होना तो स्वाभाविक है, लेकिन दोनों होना बहुत बड़ी साधना के बाद होता है। 

'कश्मीर मुद्दे पर उन्हें काफी जुड़ाव था'
उन्होंने कहा, ''सुषमाजी ने सैकड़ों घंटों अलग-अलग फोरम में धारा 370 और कश्मीर पर बोला होगा। उनका इस मुद्दे से बहुत जुड़ाव था। जब जीवन का इतना बड़ा सपना और लक्ष्य पूरा हो, खुशी नहीं समाती। सुषमाजी के जाने के बाद मैं बांसुरी से मिला। उन्होंने कहा कि इतनी खुशी के साथ वे गई हैं, इसकी कल्पना ही की जा सकती है। उनका मन उमंग से नाच रहा था। इस खुशी के पल को जीते-जीते वे श्रीकृष्ण के चरणों में पहुंच गईं।''

'प्रोटोकॉल को पीपल्स कॉल में बदला'
मोदी ने कहा, "आमतौर पर विदेश मंत्रालय यानी कोट-पैंट-टाई के आसपास ही रहता था। प्रोटोकॉल की ही दुनिया माना जाता था। सुषमाजी ने इस प्रोटोकॉल की पूरी परिभाषा को पीपल्स कॉल में बदल दिया। वसुधैव कुटुम्बकम विदेश मंत्रालय कैसे सिद्ध कर सकता है, उन्होंने पूरे विश्व में फैले भारतीय समुदाय के साथ निकटता को जोड़कर साबित किया। अगर कोई भारतीय है कहीं तो उसका खून मेरा खून है। यह संस्कृति विदेश मंत्रालय में लाने का काम उन्होंने किया। इतना बड़ा बदलाव करना कहने में सरल लगता है, लेकिन पल-पल एक-एक चीज को गढ़ना पड़ता है। यह काम सुषमाजी ने किया।

'सुषमाजी ने मेरे विचार जानकर मेरी स्पीच लिखी'
उन्होंने कहा, "आजादी के वक्त करीब 77 पासपोर्ट ऑफिस थे। 70 साल में 77 पासपोर्ट ऑफिस थे और 5 साल में 505 ऑफिस हो गए। यह काम सुषमाजी सहज रूप से करती थीं। विदेश मंत्रालय की कुछ परंपराएं उत्तम परंपराए हैं। मैं नया था। संयुक्त राष्ट्र में पहला भाषण होना था और सुषमाजी पहले पहुंच गई थीं। मैं पहुंचा और वे मुझे रिसीव करने के लिए खड़ी थीं। मैंने कहा कि बताइए क्या करना है। उन्होंने कहा कि आपकी स्पीच कहां है। मैंने कहा बोल देंगे। उन्होंने कहा कि आप अपनी मनमर्जी से नहीं बोल सकते। पूरी दुनिया के मंच पर भारत को प्रस्तुत करना है। उन्होंने रात को ही मेरे विचार जाने और उसे लिखा गया। उनका बहुत बड़ा जोर था कि आप कितने ही अच्छे वक्ता क्यों ना हो, लेकिन कुछ फोरम पर कुछ मर्यादाएं होती हैं, यह सुषमाजी ने पहले ही मुझे सिखा दिया था।''

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