भोपाल. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा स्पीकर को आज यानी शुक्रवार को 5 बजे तक फ्लोर टेस्ट करवाने का निर्देश दिया था। लेकिन फ्लोर टेस्ट से पहले ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मीडिया को संबोधित करते हुए साफ कर दिया कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। जिसके बाद उन्होंने राज्यपाल लालजी टंडन से मिलकर उनको इस्तीफा सौंप दिया। 

इससे पहले उन्होंने अपनी उपलब्धियों को भी गिनाया। साथ ही उन्होंने इस स्थिति के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, मैंने दिसंबर में शपथ ली थी। आज 15 महीने हुए हैं। मैंने हमेशा विकास पर विश्वास जताया है। जनता ने 5 साल का मौका दिया था, जिससे प्रदेश की नई पहचान बने। मध्यप्रदेश की तुलना छोटे राज्यों से नहीं बड़े राज्यों से हो। भाजपा को 15 साल मिले, मुझे सिर्फ 15 महीने।

'भाजपा को रास नहीं आया हमारा काम'
उन्होंने कहा, ढाई महीने लोकसभा चुनाव और आचार संहिता में गुजरे। इन 15 महीनों मे राज्य का हर नागरिक गवाह है कि मैंने राज्य के लिए जन हितैषी कार्य किया। लेकिन बीजेपी को ये काम रास नहीं आए और उसने हमारे खिलाफ निरंतर काम किया। 15 महीनों में मेरा प्रयास रहा कि हम प्रदेश को नई दिशा दें, प्रदेश की तस्वीर बदलें। मेरा क्या कसूर था? इन 15 महीनों में मेरी क्या गलती थी? 

करोड़ों खर्च कर हमारे खिलाफ साजिश रची गई
पहले दिन से ही भाजपा ने षड्यंत्र किया। प्रदेश के साथ धोखा करने वाली बीजेपी को जनता माफ नहीं करेगी। भाजपा ने 22 विधायकों को प्रलोभन देकर कर्नाटक में बंधक बनाने का काम किया। इसकी सच्चाई देश की जनता देख रही है। करोड़ों रुपये खर्च करके यह खेल खेला गया। 

अब तक 23 विधायकों के हुए इस्तीफे
उधर, अब तक 23 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार हो चुके हैं। इनमें एक भाजपा और 22 कांग्रेस के हैं। इससे पहले गुरुवार की रात करीब डेढ़ बजे जारी की गई विधानसभा की कार्यवाही की सूची में फ्लोर टेस्ट का जिक्र किया गया है।

फ्लोर टेस्ट से पहले स्पीकर एनपी प्रजापति ने आधी रात कांग्रेस के 16 बागी विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। वहीं, दूसरी तरफ सीएम कमलनाथ ने शुक्रवार दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। कांग्रेस के सभी विधायक मुख्यमंत्री आवास पर पहुंच गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, कमलनाथ इस कॉन्फ्रेंस में अपने इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं।

मैंने दुखी मन से इस्तीफे स्वीकार किएः एनपी प्रजापति

मध्यप्रदेश विधानसभा स्पीकर एनपी प्रजापति ने कहा कि मैंने 16 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। विधानसभा का इतिहास है कि इतनी ज्यादा संख्या में विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करना एक अध्यक्ष को कितना भारी लगता है, कितना दुखी मन होता है। लेकिन क्या करें सदस्य खुद इस्तीफा दे रहे हैं।

हमारे पास बहुमत नहींः दिग्विजय सिंह 

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह शुक्रवार की सुबह मीडिया से बात करते हुए कहा,'हमारे पास नंबर नहीं है। उन्होंने कहा कि 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है, ऐसे में देखना होगा क्या होगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने 5 बजे तक फ्लोर टेस्ट कराने के लिए कहा था
सुप्रीम कोर्ट ने कमलनाथ सरकार को फ्लोर टेस्ट करने के लिए कहा था। इसके साथ ही यह भी साफ किया कि फ्लोर टेस्ट की लाइव स्ट्रीमिंग कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा के स्पीकर एनपी प्रजापति को फ्लोर टेस्ट के लिए आज विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया शाम 5 बजे तक पूरी करने को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्पीकर प्रजापति ने कहा- विधायिका न्यायालय के निर्देशों का पालन कर रही है। दोनों ही संवैधानिक संस्थाएं हैं। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हम निराश नहींः कमलनाथ 

सुप्रीम कोर्ट द्वारा फ्लोर टेस्ट का आदेश दिए जाने के बाद  कमलनाथ ने गुरुवार को विधायक दल की बैठक बुलाई। बैठक में कमलनाथ ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हम निराश नहीं हैं। हम आज भी एकजुट हैं। भाजपा ने हमारे विधायकों को कर्नाटक में बंधक बनाकर एक गंदा खेल खेला है। हमारे जनता के लिए किए गए कामों से बौखलाकर हमें अस्थिर करने के लिए भाजपा ने सब किया है। हम हर चुनौती का सामाना करेंगे।

मध्य प्रदेश में कब और कहां से शुरू हुआ राजनीति ड्रामा?

मध्य प्रदेश में ड्रामे की शुरुआत 4 मार्च को हुई थी। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, भाजपा उनके विधायकों को दिल्ली ले जा रही है। कांग्रेस ने दावा किया कि उनके 6 विधायक, बसपा के 2 और एक निर्दलीय विधायक को गुरुग्राम के एक होटल में बंधक बनाया गया है। हालांकि, 1 दिन बाद 6 विधायक लौट आए। इनमें 2 बसपा और 1 सपा का विधायक भी शामिल था। हालांकि, चार विधायक फिर भी लापता रहे, उनमें से एक ने हरदीप सिंह डंग ने इस्तीफा भी दे दिया।

9 मार्च को सिंधिया ने की बगावत

मध्यप्रदेश में 9 मार्च को ड्रामा और तेज तब हो गया, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के 22 कांग्रेसी विधायक अचानक भोपाल से बेंगलुरु चले गए। इन 22 विधायकों में से 6 कमलनाथ सरकार में मंत्री भी थे। इसके साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 10 मार्च को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिया और 11 मार्च को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। इससे पहले 10 मार्च को सिंधिया खेमे के 22 विधायकों ने अपना त्याग पत्र राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष को भेजा था। जिसके बाद से प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी की सरकार संकट में घिरी हुई है।वहीं, भाजपा के पास 107 विधायक हैं। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा ने अपने 105 विधायकों को गुरुग्राम के एक होटल में भेज दिया था। वहीं, कांग्रेस ने अपने बाकी विधायकों को जयपुर भेज दिया है। इस वक्त कांग्रेस और भाजपा दोनों के विधायक भोपाल लौट आए हैं। लेकिन अभी सिंधिया खेमे के बागी विधायक कर्नाटक में ही हैं।

मध्यप्रदेश में यह है विधानसभा का समीकरण?

मध्य प्रदेश में कुल विधानसभा सीटें- 230
दो विधायकों को निधन के बाद यह संख्या- 228
23 विधायकों ने इस्तीफा सौंपा, सभी के इस्तीफे मंजूर 
अब विधानसभा संख्या- 205
बहुमत के लिए चाहिए-103
भाजपा के पास- 106
कांग्रेस के पास- 99 (4- निर्दलीय, 2- बसपा, 1- सपा)

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