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सोशल मीडिया गाइडलाइन के खिलाफ दिल्ली HC पहुंचा वॉट्सऐप, यूजर्स की चैट ट्रेस करने से इनकार

तीन महीने पुरानी सोशल मीडिया गाइडलाइन का पालन करने से वॉट्सऐप ने मना करा दिया है। केंद्र सरकार के इस आदेश के खिलाफ उसने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वॉट्सऐप ने कहा कि किसी यूजर्स की चैट पर नजर रखना उसकी निजता का उल्लंघन होगा। बता दें कि केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को इसके लिए 25 मई तक का समय दिया था।

Privacy and government guidelines on social media, WhatsApp petition in Delhi High Court kpa
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New Delhi, First Published May 26, 2021, 12:19 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को एक गाइडलाइन बनाकर उनका पालन करने का निर्देश दिया था। इसे 25 मई तक लागू करना था, लेकिन वॉट्सऐप ने केंद्र के इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। तीन महीने पुरानी सोशल मीडिया गाइडलाइन का पालन करने से वॉट्सऐप ने मना करा दिया है। केंद्र सरकार के इस आदेश के खिलाफ उसने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वॉट्सऐप ने कहा कि किसी यूजर्स की चैट पर नजर रखना उसकी निजता का उल्लंघन होगा। बता दें कि केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को इसके लिए 25 मई तक का समय दिया था। वाट्सऐप ने इसे आईटी नियमों के खिलाफ बताया है। 

गाइडलाइन को निजता का उल्लंघन बताया
वॉट्सऐप सहित तमाम सोशल मीडिया कंपनियों के लिए केंद्र सरकार ने गाइडलाइन जारी की थी। इसके तहत कंपनियों को यूजर्स के मैसेज के ओरिजिन की जानकारी सुरक्षित रखनी थी। लेकिन वॉट्सऐप ने इसे यूजर्स की निजता का उल्लंघन मानते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वॉट्सऐप ने हवाला दिया है कि उसके लिए सारे मैसेज पर नजर रखना संभव नहीं। इससे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का फिर कोई औचित्य नहीं बचेगा।

25 फरवरी को जारी की थी गाइडलाइन
केंद्र सरकार ने 25 फरवरी को यह गाइडलाइन जारी की थी। से 3 महीने में लागू करना था। लेकिन वॉट्सऐप, ट्विटर और इंस्टाग्राम ने सरकार को नहीं बताया कि उन्होंने गाइडलाइन का पालन करने क्या तैयारियां कीं। ऐसे में सरकार कोई कड़ा कदम उठा सकती थी। कल दिनभर सोशल मीडिया पर सवाल उठते रहे कि क्या फेसबुक, ट्वीटर, वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम बंद हो जाएंगे? हालांकि वॉट्सऐप पर मालिकाना हक रखने वाली सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने मंगलवार को जरूर कहा था कि वो आईटी के नियमों का पालन करेगी। इसके अलावा सरकार से बातचीत जारी रखेगी।

सरकार ने यह जारी की थी गाइडलाइन

  • सोशल मीडिया कंपनियां भारत में अपने 3 अधिकारियों, चीफ कॉम्प्लियांस अफसर, नोडल कॉन्टेक्ट पर्सन और रेसिडेंट ग्रेवांस अफसर नियुक्त करेंगी। इनका आफिस भारत में ही होना चाहिए। ये अपना संपर्क नंबर वेबसाइट पर पब्लिश करेंगी।
  • सभी कंपनियां शिकायत के लिए एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएंगी। शिकायतों पर 24 घंटे के अंदर संज्ञान लिया जाएगा। वहीं, संबंधित अधिकारी 15 दिनों के अंदर शिकायतकर्ता को जांच की प्रगति रिपोर्ट देगा। 
  • सभी कंपनियां ऑटोमेटेड टूल्स और तकनीक के जरिए कोई ऐसा सिस्टम बनाएंगी, जिससे रेप, बाल यौन शोषण से संबंधित कंटेंट को पहचाना जा सके। साथ ही यह किसने पोस्ट किया, वो भी पता चल सके। इस पर सतत निगरानी होनी चाहिए।
  • सभी कंपनियां हर महीने एक रिपोर्ट पब्लिश करेंगी, जिसमें शिकायतों के निवारण और एक्शन की जानकारी होगी। जो कंटेंट हटाया गया, वो भी बताना होगा।
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