मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उस समय शहीद की अर्थी को कंधा भी दिया था और अपनी एक महीने की सैलरी शहीद के परिवार को देने का वादा किया था। पर आज तक इस सैलरी का एक रुपया शहीद के परिवार को नहीं मिला। 

नई दिल्ली. पुलवामा हमले में पूरे देश का दिल दहला था तो लोगों की भावनाओं पर राजनीति भी जमकर हुई थी। झारखंड के रहने वाले एक शहीद जवान का परिवार भी कुछ ऐसी ही राजनीति का शिकार हुआ है। 16 फरवरी की दोपहर झारखंड के गुमला जिले में शहीद विजय सोरेंग का अंतिम संस्कार किया गया। इस समय देश के प्रधानमंत्री से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री तक सभी ने ऐसी घोषणाएं की तो लगा कि जवान की शहादत का ईनाम अबकी बार परिवार की अनदेखी नहीं होगी, पर समय के साथ हकीकत सामने आ गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उस समय शहीद की अर्थी को कंधा भी दिया था और अपनी एक महीने की सैलरी शहीद के परिवार को देने का वादा किया था। पर आज तक इस सैलरी का एक रुपया शहीद के परिवार को नहीं मिला। 

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मुख्यमंत्री का कार्यकाल भी पूरा पर नहीं मिली सैलरी 
इस वादे के बाद राज्य में चुनाव भी हुए और मुख्यमंत्री साहब विपक्ष में आ गए। पर अभी तक शहीद के परिवार को उसका हक नहीं मिला। राज्य के अधिकारियों के वेतन का एक दिन का पैसा भी शहीद के परिवार को मिलना था, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। विजय का परिवार आज भी एक कच्चे खपरैल वाले मकान में रहता है। 

CCL और BCCL ने दिखाई लापरवाही 
कोल इंडिया की कंपनियों ने भी मौसमी देशभक्ति की भावना में बहकर अपने कर्मचारियों के वेतन का एक दिन का पैसा शहीद के परिवार को देने की बात कही थी। आनन-फानन में कर्मचारियों का पैसा भी काट लिया गया, पर आज तक शहीद के परिवार को पैसा नहीं मिला है। इस पर कंपनियों का कहना है कि घरेलू विवाद के कारण पैसा नहीं दिया गया। 

शहीद की दोनों पत्नियों के बीच है झगड़ा
पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए विजय की दो पत्नियां हैं उनके बीच पैसे के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है। उनकी पहली पत्नी कारमेला बा झारखंड सशस्त्र पुलिस का हिस्सा हैं। वो रांची में अपने 24 साल के बेटे के साथ रहती हैं। उनका मानना है कि पूरा पैसा दोनों पत्नियों के बीच आधा-आधा बांट दिया जाए। जबकि उनकी दूसरी पत्नी विमला देवी सिमडेगा जिले में रहती हैं। उनके चार बच्चे हैं। विमला का भी मानना है कि अगर सरकार पैसा देना चाहे तो एक दिन में विवाद का छुटकारा हो सकता है।