Karur stampede: सुप्रीम कोर्ट ने करूर में विजय की रैली के दौरान हुई भगदड़ की जांच CBI को सौंप दी है। कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट की आलोचना करते हुए कहा कि उसने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसला दिया है।

Karur stampede: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु के करूर में विजय की टीवीके रैली के दौरान हुई भगदड़ की जांच के लिए CBI को जांच का आदेश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में CBI जांच की निगरानी के लिए तीन सदस्यीय समिति भी नियुक्त की है। न्यायाधीश जे. के. महेश्वरी और एन. वी. अंजरिया की बेंच ने सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अजय रस्तोगी को तीन सदस्यीय समिति का प्रमुख नियुक्त किया, जो CBI जांच की निगरानी करेगी।

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मद्रास हाईकोर्ट की चेन्नई बेंच की आलोचना की

जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि निगरानी समिति में तमिलनाडु कैडर के दो ऐसे आईपीएस अधिकारी भी शामिल किए जा सकते हैं, जो राज्य के मूल निवासी न हों। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मद्रास हाईकोर्ट की चेन्नई बेंच की आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि करूर क्षेत्र मदुरै बेंच के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए चेन्नई बेंच को इस मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए थी। इसके बावजूद चेन्नई बेंच ने एसआईटी जांच का आदेश दे दिया, जबकि याचिका में सिर्फ राजनीतिक रैलियों के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई थी, न कि करूर हादसे की जांच की।

भगदड़ में हुई थी 41 लोगों की मौत

जस्टिस जेके महेश्वरी और एनवी अंजारिया की बेंच ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से सवाल किया कि TVK की रैली को अनुमति क्यों दी गई। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी पूछा कि हाईकोर्ट ने SIT जांच का आदेश कैसे दिया, जबकि ये मामला मदुरै बेंच के दायरे में था। 27 सितंबर को विजय की रैली में हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई और कम से कम 60 लोग घायल हुए। अधिकारियों के अनुसार, रैली स्थल की क्षमता लगभग 10,000 थी, लेकिन वहां करीब 30,000 लोग इकट्ठा हो गए थे। सुरक्षा नियमों का पालन नहीं हुआ और खाने-पीने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, जिससे यह हादसा हुआ। इस मामले में भाजपा नेता उमा आनंदन और TVK ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर CBI जांच की मांग की थी।

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