राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय घोटाले की स्वतंत्र जांच की मांग पर 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। वहीं, ट्रस्ट के सदस्य ने चंपत राय समेत अन्य की VIP पास आईडी ब्लॉक करने की खबरों को खारिज किया है। SIT की जांच में कैश चोरी के सुराग मिले हैं।

सुप्रीम कोर्ट में 13 जुलाई को सुनवाई

अयोध्या (उत्तर प्रदेश) [भारत], 10 जुलाई (ANI): सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। ये याचिकाएं भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की बेंच के सामने सुनवाई के लिए लिस्टेड हैं।

ट्रस्ट ने VIP पास ब्लॉक करने की खबरों को किया खारिज

इस बीच, श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेन्द्र दास महाराज ने उन रिपोर्टों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि ट्रस्ट ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के वीआईपी दर्शन पास आईडी को ब्लॉक कर दिया है। उन्होंने पुष्टि की कि चंपत राय की आईडी का उपयोग करके पास वास्तव में जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "अभी तक कोई समस्या नहीं है। यह अभी भी लागू है। मेरे पास इसके अलावा कोई और जानकारी नहीं है; मौजूदा व्यवस्था अभी भी जारी है।"

इससे पहले गुरुवार को दिनेन्द्र दास ने उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन पर अपना पूरा भरोसा जताया था। उनका बयान तब आया जब अयोध्या पुलिस ने मामले के तीन मुख्य आरोपियों में से एक अनुकल्प मिश्रा से हिरासत में पूछताछ शुरू की। एएनआई से बात करते हुए, महंत दिनेन्द्र दास ने दान की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर चिंताओं को खारिज कर दिया और जोर देकर कहा कि संचालन अप्रभावित है।

उन्होंने कहा, "हमें राम लला पर विश्वास है, और मुख्यमंत्री और प्रशासन पूरी तरह से अवगत और इसमें शामिल हैं। हमें पुलिस पर पूरा भरोसा है; वे अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। वे हर तरह से चोरों को पकड़ेंगे और उन्हें दंडित भी करेंगे।"

SIT की जांच में सुरक्षा में गंभीर चूक का खुलासा

इस कथित गबन ने उत्तर प्रदेश में एक गरमागरम राजनीतिक विवाद छेड़ दिया है, और विशेष जांच दल (SIT) अनियमितताओं की जांच कर रहा है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में अयोध्या में राम मंदिर के काउंटिंग रूम में सुरक्षा में गंभीर चूक की ओर इशारा किया गया है। जांच में कहा गया है कि यहां के कर्मचारियों ने कथित तौर पर अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और अन्य निजी सामानों में नकदी के बंडल छिपाए। जांच में यह भी बताया गया है कि यह कथित चोरी "व्यवस्थित" थी और बार-बार दोहराई गई, न कि यह कोई अकेली घटना थी।

एसआईटी के मुताबिक, 27 अप्रैल से 5 जून के बीच जांचे गए सीसीटीवी फुटेज में गिनती करने वाले कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर नकदी के बंडल छिपाने की लगभग 70 संदिग्ध घटनाएं कैद हुई हैं। एसआईटी के शुरुआती निष्कर्षों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल में खामियों की ओर इशारा किया है। इसमें कहा गया है कि "काउंटिंग हॉल के एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर कर्मचारियों की कोई तलाशी नहीं होती थी, साथ ही कर्मचारियों द्वारा अंदर और बाहर ले जाए जाने वाले निजी सामानों की भी खराब निगरानी थी।"

जहां समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित विपक्षी नेताओं ने राज्य सरकार से जवाबदेही की मांग की है, वहीं सीएम आदित्यनाथ ने मंदिर के लिए आए धन का दुरुपयोग करने वाले किसी भी दोषी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई का बार-बार वादा किया है। (ANI)

(Except for the headline, this story has not been edited by Asianetnews Editorial staff and is published from a syndicated feed.)