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संजय राउत की अनिल देशमुख की सीख- गृह मंत्री को कम बोलना चाहिए, पसंदीदा अधिकारी ही डूबने की वजह बने

एंटीलिया केस, मनसुख हिरेन की हत्या, सचिन वझे और मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह द्वारा गृह मंत्री अनिल देशमुख पर लगाए गए आरोपों के चलते महाराष्ट्र सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इसी बीच शिवसेना के मुखपत्र सामना ने भी इस मामले में गृह मंत्री अनिल देशमुख को नसीहत दे डाली।

Shiv Sena slams maharashtra government for its inability to counter allegations against Anil Deshmukh KPP
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Mumbai, First Published Mar 28, 2021, 1:51 PM IST
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मुंबई. एंटीलिया केस, मनसुख हिरेन की हत्या, सचिन वझे और मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह द्वारा गृह मंत्री अनिल देशमुख पर लगाए गए आरोपों के चलते महाराष्ट्र सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इसी बीच शिवसेना के मुखपत्र सामना ने भी इस मामले में गृह मंत्री अनिल देशमुख को नसीहत दे डाली। सामना में शिवसेना नेता संजय राउत ने लिखा कि गृह मंत्री को कम-से-कम बोलना चाहिए। 

दरअसल, 25 फरवरी को रिलायंस इंडस्ट्री के चेयरमैन मुकेश अंबानी के घर के पास कार में विस्फोटक मिला था। कुछ दिन बाद कार के मालिक भी हत्या कर दी गई। वहीं, इस मामले में एनआईए ने मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वझे को गिरफ्तार किया है। वहीं, मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने पत्र लिखकर गृह मंत्री अनिल देशमुख पर वसूली के गंभीर आरोप लगाए हैं। 

परमबीर सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करेंगे पूर्व जज
इसी बीच महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा, जो आरोप मुझ पर पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर ने लगाए थे, मैंने उसकी जांच कराने की मांग की थी। मुख्यमंत्री और राज्य शासन ने मुझ पर लगे आरोपों की जांच उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज के द्वारा करने का निर्णय लिया है। जो भी सच है वह सामने आएगा। 

सामना ने सचिन वझे को लेकर भी उठाए सवाल
संजय राउत ने लिखा, सचिन वझे एक सहायक पुलिस निरीक्षक है। उसका इतना महत्व कैसे बढ़ गया। इसकी जांच होनी चाहिए। वझे एक रहस्यमयी मामला बन गया। पुलिस आयुक्त, गृह मंत्री, मंत्रिमंडल के प्रमुख लोगों का दुलारा और विश्वासपात्र रहा। उसे मुंबई पुलिस का असीमित अधिकार किसके आदेश पर मिला। वह मुंबई पुलिस आयुक्तालय में बैठकर वसूली कर रहा था और गृह मंत्री को इस बारे में जानकारी नहीं थी। 

देशमुख को दुर्घटनावश मिला गृह मंत्री का पद
सामना में आगे लिखा है कि अनिल देशमुख को गृह मंत्री का पद दुर्घटनावश मिल गया। दरअसल, जयंत पाटिल, दिलीप वलसे ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद शरद पवार ने यह पद देशमुख को सौंपा। इस पद की एक गरिमा और रुतबा है। संदिग्ध व्यक्ति के घेरे में रहकर राज्य के गृह मंत्री पद पर बैठा कोई भी व्यक्ति काम नहीं कर सकता है। 

राउत ने लिखा, अनिल देशमुख ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से बेवजह पंगा लिया। गृह मंत्री को कम-से-कम बोलना चाहिए। बेवजह कैमरे के सामने जाना और जांच का आदेश जारी करना अच्छा नहीं है। सौ सुनार की एक लोहार की ऐसा बर्ताव गृह मंत्री का होना चाहिए. पुलिस विभाग का नेतृत्व सिर्फ सैल्यूट लेने के लिए नहीं होता है। वह प्रखर नेतृत्व देने के लिए होता है। प्रखरता ईमानदारी से तैयार होती है, ये भूलने से कैसे चलेगा?''

महाराष्ट्र की बदनामी हुई
संजय राउत ने लिखा है, मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्रर परमबीर सिंह द्वारा गृह मंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ की वसूली का आरोप लगाने का मामला आज भी खलबली मचा रहा है। ऐसे माहौल तैयार किया जा रहा था कि परमबीर सिंह के आरोपों के कारण अनिल देशमुख को गृह मंत्री के पद से जाना होगा और सरकार डगमगाएगी, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इसके बावजूद देशभर में इस प्रकरण पर चर्चा हुई और महाराष्ट्र की बदनामी हुई!

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