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संसदीय समिति का सुझाव : महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में 30 दिन के अंदर दाखिल हो चार्जशीट


भाजपा नेता सत्यनारायण जटिया की अध्यक्षता वाली मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबंधित स्थायी समिति ने महिलाओं की सुरक्षा पर अपनी रिपोर्ट गुरूवार को संसद के दोनों सदनों में पेश की। समिति ने नवंबर 2019 में एक युवती के साथ जघन्य बलात्कार एवं बाद में उसकी हत्या किए जाने की घटना पर पीड़ा जताते हुए अपनी रिपोर्ट में इस प्रकार की घटनाओं को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाये जाने का सुझाव दिया।

Suggestion of Parliamentary Committee: Chargesheet should be filed in cases of crime against women within 30 days kpm
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New Delhi, First Published Mar 19, 2020, 8:50 PM IST
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नई दिल्ली. महिलाओं के खिलाफ अपराध के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए संसद की एक समिति ने ऐसे मामलों में 30 दिन के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने, आरोपियों को जमानत नहीं देने और ऐसे मामलों को छह माह के भीतर निस्तारित करने का सुझाव दिया है।

2018 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 38 हजार मामले सामने आए

भाजपा नेता सत्यनारायण जटिया की अध्यक्षता वाली मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबंधित स्थायी समिति ने महिलाओं की सुरक्षा पर अपनी रिपोर्ट गुरूवार को संसद के दोनों सदनों में पेश की। समिति ने नवंबर 2019 में एक युवती के साथ जघन्य बलात्कार एवं बाद में उसकी हत्या किए जाने की घटना पर पीड़ा जताते हुए अपनी रिपोर्ट में इस प्रकार की घटनाओं को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाये जाने का सुझाव दिया। समिति ने अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले एक दशक में महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं का बढ़ना चिंताजनक है। समिति ने ध्यान दिलाया कि 2012 में महिलाओं के विरूद्ध अपराध की संख्या 244270 थी जो 2017 में बढ़कर 359849 और 2018 में 378277 हो गयी।

कमेटी की सलाह महिलाओं से जुडे कानून की कड़ाई से पालन हो

रिपोर्ट में इस बात को लेकर चिंता जतायी गयी कि तमाम कानून एवं कानूनी ढांचा होने के बावजूद देश में महिलाओं के प्रति अपराध में कोई कमी नहीं आ रही है। समिति ने सिफारिश की कि महिलाओं से जुडे कानूनों का कड़ाई से पालन किया जाये, महिलाओं के खिलाफ अपराध में 30 दिन के भीतर आरोपपत्र दायर किया जाये, आरोपियों को जमानत नहीं दी जाये तथा मामले को छह महीने के भीतर निस्तारित किया जाए ताकि पीड़िताओं को समय पर न्याय मिल सके।

2 साल के भीतर प्रत्येक राज्य की राजधानी में फोरेंसिक लैब बनाए जाए

समिति ने ध्यान दिलाया कि बलात्कार के 86 प्रतिशत मामलों में आरोपपत्र दायर होने पर दोष सिद्धि केवल 32 प्रतिशत मामलों में हो पाती है। समिति ने गृह मंत्रालय से सिफारिश की है कि दो साल के भीतर प्रत्येक राज्य की राजधानी में एक फोरेंसिक प्रयोगशाला स्थापित की जाए ताकि अपराधियों के खिलाफ मजबूती से मामला पेश किया जा सके।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

(प्रतीकात्मक फोटो)

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