भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार को तमिलनाडु के तंजावुर से ब्रह्मोस मिसाइलों का सुखोई लड़ाकू विमानों (SU-30 MKI) से सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया है। बता दें कि भारतीय वायुसेना द्वारा यह परीक्षण हिंद महासागर में किया गया है।

तंजावुर. भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार को तमिलनाडु के तंजावुर से ब्रह्मोस मिसाइलों का सुखोई लड़ाकू विमानों (SU-30 MKI) से सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया है। बता दें कि भारतीय वायुसेना द्वारा यह परीक्षण हिंद महासागर में किया गया है।

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दरअसल, भारतीय वायुसेना के तंजावुर एयरबेस के टाइगर शार्क स्क्वाड्रन में शामिल सुखोई विमान ने उत्तर भारत के एक एयरबेस से उड़ान भरी और उड़ान के दौरान ही उसमें एक दूसरे विमान से इंधन भरा गया। इसके बाद सुखोई ने हिंद महासागर में ब्रम्होस मिसाइल से 300 किमी दूर एक जहाज पर निशाना साधकर यह परीक्षण सफल किया। इस मिसाइल को विमान में फिट करने के लिए कई बदलाव भी किए गए हैं।

स्क्वॉड्रन को 'टाइगर शार्क्स' दिया गया नाम
आपको बता दें कि सुखोई विमानों के इस स्क्वॉड्रन को टाइगर शार्क्स नाम दिया गया है। यह सुखोई का 12वां स्क्वॉड्रन है। इसके 11 अन्य स्क्वॉड्रन को चीन और पाकिस्तान से लगी सीमा पर नजर बनाए रखने के लिए पहले ही तैनात किया जा चुके हैं।

चीन-पाक के किसी भी आक्रामकता का देंगे करारा जवाब
ब्रह्मोस से लैस ये लड़ाकू विमान भारतीय सीमा की रक्षा करने के साथ ही चीन-पाक के किसी भी आक्रामकता का जवाब देने में सक्षम होंगे। इतना ही नहीं, ब्रह्मोस किसी एयरक्राफ्ट कैरियर को भी पल भर में तबाह करने में सक्षम है। इस मिसाइल की गति इतनी तेज है कि यह अपने दुश्मनों को जवाबी कार्रवाई करने से पहले ही उन्हें नेस्तनाबूत कर सकती है।