गूगल के सह-संस्थापकों लैरी पेज और सर्गेइ ब्रिन ने खुद को पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के सक्रिय प्रबंधन से अलग कर लिया है। अब अल्फाबेट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का पद भारतीय मूल के सुंदर पिचाई संभालेंगे।   

नई दिल्ली. गूगल के सह-संस्थापकों लैरी पेज और सर्गेइ ब्रिन ने खुद को पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के सक्रिय प्रबंधन से अलग कर लिया है। अब अल्फाबेट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का पद भारतीय मूल के सुंदर पिचाई संभालेंगे। अल्फाबेट और गूगल के प्रबंधन में हुए इस फेरबदल से पिचाई दुनिया के सबसे शक्तिशाली सीईओ में से एक बन गये हैं।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

47 साल के पिचाई ने संभाला पद
अल्फाबेट ने मंगलवार को बताया कि पेज और ब्रिन सीईओ और अध्यक्ष का पद छोड़ रहे हैं। इसके बाद गूगल के मौजूदा सीईओ पिचाई अल्फाबेट के सीईओ का पद संभालेंगे। यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है। 

- दोनों सह-संस्थापकों ने एक सार्वजनिक पत्र में कहा कि अब अल्फाबेट अच्छे से स्थापित हो चुकी है और गूगल समेत अन्य सहायक कंपनियां स्वतंत्र तरीके से प्रभावी परिचालन कर रही हैं, ऐसे में यह स्वाभाविक समय है कि प्रबंधन के स्वरूप को सरल बनाया जाए।

काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा : पिचाई
पिचाई ने कहा कि इस बदलाव से अल्फाबेट की संरचना या उसके काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने लिखा, "मैं गूगल पर अपना ध्यान केंद्रित करता रहूंगा और साथ ही कम्प्यूटिंग के दायरे को बढ़ाने, गूगल को हर किसी के लिए अधिक मददगार बनाने के अपने काम को करता रहूंगा।" उन्होंने अपने ईमेल में कहा, "साथ ही मैं अल्फाबेट और प्रौद्योगिकी के जरिए बड़ी चुनौतियों से निपटने के उसके दीर्घकालिक उद्देश्य को लेकर उत्साहित हूं।"

घर में नहीं था टीवी
तमिलनाडु के मदुरै में जन्में सुंदर पिचाई दो कमरों के घर में रहते थे। टीवी, टेलीफोन और कार जैसी सुविधाए नहीं थी। मेहनत के दम पर आईआईटी खड़गपुर में एडमिशन लिया। इंजीनियरिंग के बाद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप मिली। मीडिया रिपोट्स् के मुताबिक उस समय उनके घर की हालत इतनी खराब थी कि सुंदर के एयर टिकट के लिए उनके पिता को कर्ज लेना पड़ा था। हालांकि आज उन्होंने अपनी मेहनत से साबित कर दिया कि काबीलियत पैसों की मोहताज नहीं होती है।