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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सक्रिय राजनीति से संबंध न रखने वाले संगठनों को विदेशी चंदा लेने से नहीं रोका जा सकता

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि जिन संगठनों का राजनीति से किसी भी तरह का संबंध नहीं है उन्हें विदेशी चंदा लेने से रोका नहीं जा सकता

Supreme Court said organizations not belong to active politics cannot be stopped from taking foreign donations kpm
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New Delhi, First Published Mar 7, 2020, 10:24 AM IST
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नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि जिन संगठनों का राजनीति से किसी भी तरह का संबंध नहीं है उन्हें विदेशी चंदा लेने से रोका नहीं जा सकता। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि जनहित के लिए वैध तरीकों जैसे बंद, हड़ताल आदि का समर्थन करने के कारण किसी संगठन को विदेशी चंदा लेने के वैध अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

पीठ ने कहा कि कोई भी संगठन जो अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के समूह का बिना किसी राजनीतिक लक्ष्य या उद्देश्य के समर्थन करता है, उसे राजनीतिक स्वभाव का संगठन घोषित कर दंडित नहीं किया जा सकता।

प्रक्रिया और नियमों का कड़ाई से हो पालन

शीर्ष अदालत ने हालांकि, स्पष्ट किया कि राजनीतिक पार्टियों द्वारा विदेशी चंदे के लिए संगठनों का इस्तेमाल होने एवं इस संबंध में पुख्ता तथ्य होने पर वे कानून की सख्ती से बच नहीं सकते। पीठ ने कहा, ‘‘ किसी भी संगठन को विदेशी चंदा लेने से रोकने के लिए केंद्र सरकार को कानून में उल्लिखित प्रक्रिया और नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए।’’

न्यायालय ने कहा कि कानून के जरिए लक्ष्य पाने की कोशिश और स्वंयसेवी संगठनों के विदेशी चंदे लेने के अधिकार में संतुलन बनाना चाहिए। पीठ ने कहा कि राजनीतिक स्वभाव के संगठनों के विदेशी चंदा लेने पर रोक लगाने के कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशासन विदेशी चंदे से प्रभावित नहीं हो।

कार्यपालिका को असीमित शक्ति प्राप्त

उच्चतम न्यायालय का यह आदेश इंडियन सोशल एक्शन फोरम (इंसाफ) की याचिका पर आया जिसमें विदेशी चंदा (नियमन) कानून की धारा 5(1) को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि कानून में गतिविधि, विचार और कार्यक्रम की परिभाषा स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है जिससे कार्यपालिका को असीमित शक्ति प्राप्त होती है।

याचिकाकर्ता ने इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जहां इसे खारिज कर दिया गया था।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

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