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निर्भया के दोषियों के मौत का रास्ता हुआ साफ, राष्ट्रपति ने खारिज की पवन की दया याचिका

निर्भया के दोषी पवन ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल की है। जिस पर आज यानी सोमवार को 5 जजों की बेंच ने सुनवाई करते हुए पवन की याचिका को खारिज कर दिया है। जिसके बाद पवन ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल की है। 

the Supreme Court today hear the curative petition of Nirbhaya's guilty Pawan kps
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New Delhi, First Published Mar 2, 2020, 8:32 AM IST
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नई दिल्ली. निर्भया के दोषियों को 3 मार्च को फांसी दी जानी है। इससे पहले दोषियों ने फांसी से बचने के लिए फिर कानूनी दांव पेंच का प्रयोग किया है। जिसमें दोषी पवन ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल की है। जिस पर आज यानी सोमवार को 5 जजों की बेंच ने सुनवाई करते हुए याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषियों को फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिरी वक्त में ही याचिका क्यों दाखिल करते हो। इसके बाद पवन ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल की है। 

पटियाला हाउस कोर्ट का रोक लगाने से इंकार

निर्भया के दोषी अक्षय ने दिल्ली के पटियाला कोर्ट में फांसी पर रोक लगाने की याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है और फांसी पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। जिससे दोषियों की फांसी का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, दोषी के वकील एपी सिंह ने कोर्ट से कहा कि इस मामले में और भी तथ्य सामने आए हैं। जिसके बाद इस मामले में कोर्ट एक बार फिर 2 बजे सुनवाई की। सुनवाई पूरी करते हुए कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। 

उम्रकैद में बदलने की मांग

दोषी पवन ने अपनी पिटीशन में मांग किया था कि उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदला जाए। इसके साथ ही दोषी ने फिर दोहराया है कि घटना के दौरान वह नाबालिग था। गौरतलब है कि इससे पहले भी दोषी ने यह दावा किया था। लेकिन कोर्ट उसके इस दावे को खारिज कर दिया था। 

'याचिका लंबित है रोकी जाए फांसी'

इससे पहले, शनिवार को निर्भया केस के दो दोषियों अक्षय सिंह और पवन कुमार गुप्ता ने दिल्ली की एक अदालत में अपील दायर की। इसमें चारों दोषियों की 3 मार्च को होने वाली फांसी पर रोक की मांग की गई है। एडिशनल सेशन जज धर्मेंद्र राणा ने अक्षय की अपील पर तिहाड़ जेल प्रशासन को नोटिस जारी किया और 2 मार्च तक जवाब देने को कहा। वकील के माध्यम से दायर याचिका में कहा है कि उसने नई दया याचिका राष्ट्रपति को भेजी है और इस पर अब तक फैसला नहीं हुआ है।

फिर दाखिल की दया याचिका 

निर्भया के चारों दोषियों में शामिल अक्षय ने एक बार फिर राष्ट्रपति के सामने अपनी दया याचिका भेजी है। अक्षय का कहना है कि इससे पहले जो याचिका दाखिल की गई थी, जिसे राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया था। उसमें जानकारी अधूरी थी। जिसके कारण उसने दोबारा राष्ट्रपति से दया की गुहार लगाई है। 

तीसरी बार तय हुई है मौत की तारीख 

निर्भया के दोषियों को फांसी पर चढ़ाने के लिए अब तक 3 बार डेथ वारंट जारी किया जा चुका है। तीसरे डेथ वारंट के मुताबिक चारों दोषियों को 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा। दिल्ली के पटियाला कोर्ट ने सबसे पहले 7 जनवरी को डेथ वारंट जारी करते हुए 21 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाने का आदेश जारी किया। लेकिन दोषियों ने कानूनी अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस डेथ पर रोक लगवा दी। 

जिसके बाद एक बार फिर कोर्ट ने 17 जनवरी को मौत का पैगाम जारी किया। जिसमें चारों दोषियों को 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी दिए जाने का फरमान जारी किया। लेकिन दोषियों ने फांसी से ठीक एक दिन पहले इस पर रोक लगवा दी। जिसके बाद कोर्ट ने तीसरी बार यानी 17 फरवरी को नया डेथ वारंट जारी किया। जिसमें दोषियों को 3 मार्च को सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाने का आदेश दिया है। 

खुद को चोटिल करने की कोशिश

दोषी विनय ने नया डेथ वारंट जारी होने के बाद मौत की तारीख करीब आता देख घबराहट में सेल की दीवार पर अपना सिर पटककर खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी। हालांकि समय रहते ही सुरक्षाकर्मी उसके सेल में घुसकर उसे रोक लिया। जिसके बाद विनय को प्राथमिक इलाज के बाद उसे फिर से सेल में बंद कर दिया गया था। बताया जा रहा था कि दोषी ने फांसी से बचने के लिए खुद को चोटिल करने के लिए यह कदम उठाया है।

क्या है पूरा मामला

16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा से 6 लोगों ने चलती बस में दरिंदगी की थी। गंभीर जख्मों के कारण 26 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया की मौत हो गई थी। घटना के नौ महीने बाद यानी सितंबर 2013 में निचली अदालत ने 5 दोषियों (राम सिंह, पवन, अक्षय, विनय और मुकेश) को फांसी की सजा सुनाई थी। मार्च 2014 में हाईकोर्ट और मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी थी। ट्रायल के दौरान मुख्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। एक अन्य दोषी नाबालिग होने की वजह से 3 साल में सुधार गृह से छूट चुका है।

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