ट्विटर की याचिका पर सरकार ने आपत्ति दायर की है। हाईकोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 101 पेज का बयान दायर किया था। मंत्रालय ने कोर्ट को बताया कि ट्वीटर भारत के कानूनों का लगातार उल्लंघन कर रहा है।

Twitter Vs Centre: ट्वीटर ने कर्नाटक हाईकोर्ट में दावा किया है कि केंद्र तमाम ऐसे राजनीतिक सामग्रियों को हटाने का आदेश देती है जिसको हटाने का कोई औचित्य नहीं होता। तमाम ट्वीट्स को ब्लॉक करने का कोई कारण नहीं होता है। कई ऐसे ट्वीट को भी हटाने को कहा जाता है जो हानिकारक नहीं होते हैं लेकिन राजनीतिक वजहों से उनको हटाने का आदेश दिया जाता है। ट्वीटर ने बताया कि बिना यूजर को नोटिस किए ही सेंटर द्वारा कई ट्वीट्स को डाउन करने को कहा जाता है। हाईकोर्ट ने सुनवाई 17 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी।

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क्यों हो रही है हाईकोर्ट में सुनवाई‌?

हाई कोर्ट ट्विटर की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें केंद्र सरकार के कुछ अकाउंट्स, यूआरएल और ट्वीट्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया गया था। इस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। ट्विटर ने प्लेटफार्म से सामग्री हटाने के लिए कहने से पहले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन और अधिकारियों द्वारा कथित उल्लंघनकर्ताओं को नोटिस जारी नहीं करने के आधार पर आदेशों को चुनौती दी थी।

सरकार की ओर से आपत्ति दायर की गई

ट्विटर की याचिका पर सरकार ने आपत्ति दायर की है। हाईकोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 101 पेज का बयान दायर किया था। मंत्रालय ने कोर्ट को बताया कि ट्वीटर भारत के कानूनों का लगातार उल्लंघन कर रहा है।

ट्वीटर ने कहा-कंपनी नियमों का कर रही पालन

माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्वीटर की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार ने कहा कि कंपनी आईटी एक्ट के निर्धारित नियमों का पालन कर रही है। केंद्र, नियमविरूद्ध तरीके से यूजर्स को नोटिस किए बिना उनके अकाउंट्स को हटाने को कह रहा। ट्वीटर कह रहा कि केंद्र, अकाउंट्स को थोक में बंद करने के लिए कह रहा था, जिससे उसका व्यवसाय प्रभावित होगा। केंद्र की लिस्ट में कई प्रमुख व्यक्तियों के ट्विटर पर अकाउंट हैं। साइट ने बताया कि अनुचित समझे जाने वाले ट्वीट को ब्लॉक करने के बजाय, राजनीतिक सामग्री के कारण खाते को ब्लॉक करने के लिए कहा जा रहा था।

दातार ने कहा कि ट्विटर ऐसे ट्वीट को ब्लॉक कर देता है जो नियमविरूद्ध हैं और उनसे दिक्कतें आ सकती हैं। ट्विटर केवल प्रक्रिया का पालन कर रहा है और ट्वीट को ब्लॉक करने से पहले नोटिस जारी कर रहा था। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जबतक कोई अकाउंट गैर कानूनी सामग्री न प्रकाशित करता हो तबतक उसको सस्पेंड करना न्यायोचित नहीं है।

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