जम्मू-कश्मीर में तैनात सेना के जवान 27 वर्षीय आकाश कोइतिया की शादी का जुलूस गांव में निकल रहा था। तभी अचानक गांव के लोगों ने जवान की शादी की बारात पर पथराव करना शुरू कर दिया। 

अहमदाबाद. गुजरात के बनासकांठा जिले में 16 फरवरी रविवार को एक आर्मी जवान की शादी थी। शादी के बाद जवान ने घोड़ी पर बैठकर अपनी बारात निकाली तो गांव वालों ने उस पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इस घटना से सारी खुशियां रंज में बदल गईं। बाराती समेत दूल्हा भी घायल हो गया। 

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यह घटना सुबह 11 बजे के आसपास हुई जब जम्मू-कश्मीर में तैनात सेना के जवान 27 वर्षीय आकाश कोइतिया की शादी का जुलूस शरीफदा गांव में चल रहा था। तभी अचानक गांव के लोगों ने जवान की शादी की बारात पर घोड़ी चढ़ने की वजह से पथराव करना शुरू कर दिया। 

दलित होने के कारण फेंके पत्थर

इसकी वजह थी जवान का दलित होना। जवान गांव में दलित समुदाय से आता है ऐसे में घोड़ी पर चढ़कर बारात ले जाने पर गांव में सवर्ण जाति के लोगों ने एतजार जताया और पत्थरबाजी करके जवान की बारात को रोक दिया। 

दरअसल गांव के ठाकोर कोली समुदाय ने दलित को घोड़ी पर बारात ले जाने पर आपत्ति जताई थी। ऐसे में जवान ने पुलिस को बुला लिया और फिर पुलिस सुरक्षा के बीच बारात निकाली गई। हालांकि दलित का इतना करना काफी नहीं रहा और पुलिस की मौजूदगी में गांव वालों ने बारात पर जमकर पथराव किया।

पुलिस की मौजूदगी में हुआ पथराव

दूल्हे के बड़े भाई विजय कोइतिया ने बताया कि, "इससे पहले, हमें ठाकोर कोली समुदाय के कुछ लोगों से धमकी मिली थी कि अगर दूल्हा घोड़ी पर चढ़ता है तो वे बारात को गांव से गुजरने नहीं देंगे। हमने पुलिस सुरक्षा के लिए एक लिखित शिकायत दी थी, जिसके बाद 6-7 पुलिस कर्मचारी सुरक्षा देने आए थे।" लेकिन जैसे ही हमने गांव में बारात निकाली लोगों के एक समूह ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। हमले में दूल्हे को भी चोट आई। फिर उसे पुलिस की वैन में ले जाया गया। हालांकि, पत्थरबाजी में दो महिलाओं सहित हमारे तीन रिश्तेदार घायल हो गए। 

दंगाईयो के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

इस पूरे मामले में दूल्हे के परिवार ने बनासकांठा के गढ़ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई है। ठाकोर कोली समुदाय से संबंधित 11 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323 (हमला), 337 (दंगा अधिनियम से आहत) 294 (अश्लीलता), 506 (आपराधिक धमकी) 147 (दंगा) और 148 (घातक हथियार के साथ दंगा करना) और धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण अधिनियम)। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।