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महंत नरेंद्र गिरी Suicide Mystery: हिरासत में आते ही आनंद गिरी बोले-फंसाया जा रहा; संतों ने बताया गहरी साजिश

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri Death) की संदिग्‍ध हालात में हुई मौत के मामले में उनके शिष्य आनंद गिरी को हिरासत में लिया गया है। यह मामला मीडिया की चर्चाओं में हैं।

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Prayagraj, First Published Sep 21, 2021, 7:29 AM IST
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नई दिल्ली.अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri Death) की संदिग्‍ध हालात में हुई मौत के मामले में पुलिस ने सोमवार देर शाम उनके शिष्य आनंद गिरी को हिरासत में लिया है। गिरी को यूपी की सहारनपुर पुलिस और SOG की टीम ने हरिद्वार स्थित उनके आश्रम से पकड़ा। उनसे पहले डेढ़ घंटे तक पूछताछ हुई और फिर थाने ले जाया गया। बता दें कि नरेंद्र गिरी की सोमवार को लाश मिली थी। उनका शव प्रयागराज के उनके बाघंबरी मठ में ही फांसी के फंदे से लटकता मिला था। महंत के कमरे से 6 से 7 पेज का सुसाइड नोट भी मिला है। आईजी केपी सिंह के अनुसार, सोमवार शाम जब 5.25 बजे नरेंद्र गिरी के शिष्य बबलू ने फोन पर सूचना दी थी कि उन्होंने फांसी लगा ली है। गिरी दोपहर का भोजन करने के बाद आराम करने चले गए थे। जब काफी देर तक वे कमरे से बाहर नहीं निकले, तब शिष्यों ने पहले उन्हें फोन किया था।

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लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी भी हिरासत में
इस मामले में पुलिस ने लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप को भी हिरासत में लिया है। सुसाइड नोट में नरेंद्र गिरी ने इनके नामों का भी उल्लेख किया है। आनंद गिरी को पकड़ने उत्तराखंड पुलिस सोमवार शाम को ही कांगड़ी गाजीवाली स्थित आश्रम पहुंच गई थी। पहले उन्हें हाउस अरेस्ट रखा गया था। लेकिन रात करीब 10.30 बजे यूपी पुलिस की सहारनपुर SOG की टीम आश्रम पहुंची। वहां बंद कमरे में आनंद गिरी से करीब डेढ़ घंटे पूछताछ हुई और फिर हिरासत में ले लिया गया। हरिद्वार एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय ने बताया कि मामला उत्तर प्रदेश का है, इसलिए वहां की पुलिस उन्हें अपने साथ लेकर गई है। 

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हिरासत में लेने के बाद आनंद गिरी बोले-यह एक साजिश
पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद आनंद गिरी ने कहा कि उन्हें किसी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। आनंद गिरी ने कहा कि उनके गुरु की हत्या हुई है। इसमें कौन लोग शामिल हैं, इसका खुलासा होना चाहिए। आनंद गिरी ने कहा कि अगर वे इस मामले में दोषी हैं, तो सजा मिलनी चाहिए। वहीं, कई संतों को यह बड़ी साजिश लग रही है। उनका कहना है कि नरेंद्र गिरी सुसाइड नहीं कर सकते हैं। रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। आचार्य ने कहा कि उन्हें कोई शारीरिक तकलीफ नहीं थी। उम्र भी ज्यादा नहीं थी। ऐसे में उनकी मौत संदेह पैदा करती है। 

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सुसाइड नोट में किया था जिक्र
एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि महंत नरेंद्र गिरी का एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें लिखा है कि मठ और आश्रम को लेकर आगे क्या करना है। किस तरह से व्यवस्था होगी। क्या करना है। एक तरह से सुसाइड नोट में उनका वसीयतनामा है। एडीजी ने बताया कि महंत नरेंद्र गिरी के शव के पास मिली सुसाइड नोट में विस्तार से लिखा है कि किसे क्या देना है और किसके साथ क्या करना है। पुलिस के अनुसार सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि वह अपने एक शिष्य से दुखी थे। पुलिस ने शिष्य का नाम तो नहीं बताया लेकिन सूत्रों  के अनुसार उन्होंने आनंद गिरी का नाम लिखा है। उन्होंने लिखा है कि मैं सम्मान के बिना नहीं रह सकता। अब समझ नहीं आ रहा कि क्या कर सकता हूं। उन्होंने बेहद मार्मिक बातें लिखी हैं। उन्होंने अपनी गद्दी किसे सौंपनी है इस बारें भी लिखा है।

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