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क्या है लंपी वायरस, कैसे फैलता है? इंसानों के लिए कितनी खतरनाक है ये बीमारी, जानें सबकुछ

इंसानों पर कहर बरपाने के बाद कोरोना वायरस भले ही अब कमजोर पड़ चुका है, लेकिन एक और वायरस जानवरों की जान ले रहा है। इस वायरस का नाम लंपी वायरस (Lumpy Virus) है, जो इन दिनों मवेशियों को अपना शिकार बना रहा है। लंपी वायरस से अब तक 70 हजार से ज्यादा मवेशियों की मौत हो चुकी है। 

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First Published Sep 22, 2022, 8:00 AM IST

Lumpy Virus: इंसानों पर कहर बरपाने के बाद कोरोना वायरस भले ही अब कमजोर पड़ चुका है, लेकिन एक और वायरस जानवरों की जान ले रहा है। इस वायरस का नाम लंपी वायरस (Lumpy Virus) है, जो इन दिनों मवेशियों को अपना शिकार बना रहा है। लंपी वायरस से अब तक 70 हजार से ज्यादा मवेशियों की मौत हो चुकी है। लाखों मवेशी इसकी चपेट में आ चुके हैं। देश में इस वायरस का सबसे ज्यादा कहर राजस्थान, यूपी, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में है। आखिर क्या है लंपी वायरस, कैसे फैलता है और क्या है इसका इलाज? आइए जानते हैं।

क्या है लंपी वायरस? 
ग्लोबल अलायंस फॉर वैक्सीन एंड इम्युनाइजेशन (GAVI) के मुताबिक, लंपी एक स्किन डिसीज है। यह बीमारी जिस वायरस की वजह से होती है, उसका नाम Capripoxvirus है। इसे नीथलिंग वायरस भी कहा जाता है। ये वायरस गोटपॉक्स (Goatpox) और शिपपॉक्स (Sheepox) फैमिली से रिलेटेड है।

सबसे पहले कब आई थी बीमारी : 
लंपी वायरस से होने वाली स्किन डिसीज सबसे पहले 1929 में अफ्रीका में पाई गई थी। पिछले कुछ सालों में ये बीमारी कई देशों के पशुओं में फैल चुकी है। 2015 में तुर्की और ग्रीस के अलावा 2016 में रूस में फैली। जुलाई, 2019 में इस वायरस का कहर बांग्लादेश में भी देखा गया। अब ये भारत समेत कई एशियाई देशों में फैल रहा है। 

कैसे फैलता है लंपी वायरस?
लंपी वायरस (Lumpy Virus) यानी गांठदार त्वचा रोग (Lumpy skin disease) मवेशियों में होने वाला एक संक्रामक रोग है। ये बीमारी गाय और भैसों में ही ज्यादा देखी जा रही है। लंपी वायरस मवेशियों में मच्छर या खून चूसने वाले कीड़ों के जरिए फैलता है। अब सवाल ये उठता है कि अगर यह मच्छर की कुछ प्रजातियों और कीड़ों से फैलता है तो क्या इंसान भी इसकी चपेट में आ सकते हैं? क्या इंसानों के लिए भी लंपी वायरस खतरनाक है? 

क्या इंसानों को है लंपी वायरस का खतरा?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक लंपी वायरस की वजह से जानवरों की स्किन पर जगह-जगह निशान बन जाते हैं और सही समय पर इलाज न मिलने पर पशु मर जाते हैं। यह बीमारी गाय, भैंस, भेड़ और बकरी में तेजी से फैल सकती है। हालांकि, अभी तक लंपी वायरस से इंसानों में संक्रमण फैलने का कोई मामला सामने नहीं आया है। यह वायरस पशुओं के लिए घातक है, लेकिन इंसानों को इसका खतरा न के बराबर है। फिर भी संक्रमित पशुओं से दूरी बनाए रखनी चाहिए। 

लंपी वायरस के लक्षण?
- लंपी वायरस से संक्रमित होने के दो से तीन के भीतर जानवर को हल्का बुखार आता है। इसके बाद पूरे शरीर पर दाने निकल आते हैं। कुछ दाने घाव में बदल जाते हैं। 
- इसके साथ ही इस वायरस से संक्रमित जानवर की नाक बहती है। मुंह से लार टपकती है। अगर कोई गर्भवती गाय या भैंस वायरस से संक्रमित हो गई है, तो उसे मिसकैरेज होने का खतरा बढ़ जाता है।
- संक्रमित मवेशी के अंगों में सूजन आ जाती है। साथ ही उसको चलने में परेशानी हो सकती है। इस रोग के कारण मवेशियों में कमजोरी के साथ ही उनका दूध उत्पादन भी घट जाता है। 
- आमतौर पर 2 से 3 हफ्ते में संक्रमण ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में इससे मवेशी की मौत भी हो सकती है। इस वायरस का मोर्टिलिटी रेट 1 से 5% है। 

क्या है लंपी वायरस का इलाज?
लंपी वायरस के संक्रमण से जानवर दो से तीन हफ्ते में ठीक हो सकता है। संक्रमित होने के बाद 5 से 7 दिन तक एंटी-बायोटिक देकर इसका इलाज किया जा सकता है। इसके अलावा इसकी वैक्सीन भी है। हाल ही में लंपी वायरस की स्वदेशी वैक्सीन Lumpi-ProVacInd लॉन्च हुई है। कहा जा रहा है कि ये वैक्सीन इस वायरस को रोकने में 100% कारगर है। 

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