1- क्या विजय की ‘दलित + ब्राह्मण’ रणनीति तमिलनाडु की राजनीति बदल देगी?2- TVK कैबिनेट में ब्राह्मण मंत्रियों को जगह देकर क्या संदेश देना चाहते हैं विजय?3- क्या मायावती मॉडल अपनाकर DMK के वोट बैंक में सेंध लगाएगी TVK?

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में एक्टर विजय का एक नया दांव देखने को मिल रहा है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने अपनी कैबिनेट में दलितों को तो तवज्जो दी ही है, साथ ही सवर्ण हिंदुओं को भी जोड़ने की कोशिश की है। कैबिनेट में ब्राह्मण मंत्रियों को जगह देना, उत्तर प्रदेश में मायावती की अपनाई गई रणनीति जैसा ही है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

जब विजय की पूरी कैबिनेट बनी, तो उसमें आठ दलित मंत्री शामिल किए गए। दलितों को मिले इस ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व की तो तारीफ हो ही रही है, लेकिन चर्चा ब्राह्मण समुदाय को मिली जगह की भी है। राज्य की आबादी में 3% से भी कम हिस्सेदारी वाले ब्राह्मण समुदाय से 1952 के बाद पहली बार दो मंत्री बनाए गए हैं। इनमें से एक हैं मैलापुर के विधायक और TVK के कोषाध्यक्ष पी. वेंकटरमणन, जिन्होंने विजय के साथ ही शपथ ली। वहीं, दूसरे हैं पार्टी के तेज-तर्रार नेता और 31 साल के श्रीरंगम विधायक रमेश, जिन्हें दूसरे फेज में देवस्वम विभाग का मंत्री बनाया गया। विजय का यह कदम इसलिए भी खास है क्योंकि DMK, AIADMK और BJP जैसी पार्टियां ब्राह्मण उम्मीदवारों को मैदान में उतारने से हिचकती रही हैं।

इस कदम को मायावती की रणनीति के 'द्रविड़ वर्जन' के तौर पर देखा जा रहा है, जिन्होंने दलित वोट बैंक को पक्का करने के साथ-साथ ब्राह्मणों का समर्थन हासिल कर यूपी में सरकार बनाई थी। वहीं, DMK नेता पहले ही मान चुके हैं कि कोलाथुर में एम.के. स्टालिन की हार की एक वजह दलित और ईसाई वोटों का खिसकना था। अब कैबिनेट में मुस्लिम समुदाय से भी दो मंत्रियों के आने के बाद, TVK को उम्मीद है कि वो DMK के अल्पसंख्यक वोट बैंक में और भी गहरी सेंध लगा सकती है।