Ajit Pawar Big Decisions: डिप्टी सीएम अजित पवार के राजनीतिक फैसले हमेशा महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल लाते रहे। चाचा शरद पवार से दूरी, पार्टी में बगावत, विवादित बयान और बड़े फैसलों ने उन्हें राजनीति के साहसी खिलाड़ी के रूप में पहचान दिलाया। 

Ajit Pawar 5 Key Political Moves: महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे धुरंधर लीडर्स में से एक अजित पवार का आज, 28 जनवरी को निधन हो गया। 6 बार डिप्टी सीएम रहे अजित पवार की उम्र 66 साल थी। बुधवार को बारामती में लैंडिंग के दौरान प्लेन क्रैश में उनके साथ उनके पर्सनल असिस्टेंट, सुरक्षाकर्मी और स्टाफ की भी मौत हो गई। अजित पवार की पॉलिटिकल लाइफ के फैसले हमेशा चर्चा में रहें। उनके 5 फैसले तो ऐसे रहें, जिन्होंने परिवार या पार्टी ही नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति को हिला दिया था।

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शरद पवार के लिए लोकसभा सीट छोड़ी

अजित पवार ने 1993 में पहली बार बारामती से सांसद बनने का मौका पाया, लेकिन उन्होंने अपने चाचा और एनसीपी नेता शरद पवार के लिए अपनी सीट छोड़ दी। इस फैसले से शरद पवार रक्षा मंत्री बन सके। अजित ने हमेशा साबित किया कि उनके लिए परिवार और पार्टी की राजनीति अलग हो सकती है।

2019 में बागी बनकर बीजेपी में शामिल होना

महाविकास अघाड़ी की बैठक के तुरंत बाद अजित पवार ने NCP छोड़ बीजेपी जॉइन कर लिया। यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल जैसा था। इसे चाचा शरद पवार से बगावत भी माना गया। 2 दिसंबर 2019 को उन्होंने 80 घंटे में शपथ ली और राज्य के डिप्टी सीएम बने। हालांकि, बाद में वे वापस NCP लौट आए। इस कदम ने महाराष्ट्र में सत्ता समीकरण को पलट दिया और बीजेपी-NCP दोनों के लिए नया खेल शुरू किया।

परिवार और पार्टी में नए चेहरों को आगे बढ़ाना

अजित पवार ने हमेशा नए नेताओं को मौके देने की सोच रखी। 2023 में जब शरद पवार ने NCP अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान किया, अजित ने नए चेहरों को आगे लाने का समर्थन किया। उनके इस फैसले ने पार्टी के भीतर बदलाव की हवा लाई, लेकिन कभी-कभी इसे बगावत के रूप में भी देखा गया। एनसीपी दो धड़ों में बंट गई और अजित पवार फिर से एनडीए के साथ चले गए।

लोकसभा में बहन के सामने पत्नी को चुनाव लड़ाना

2024 के लोकसभा चुनाव में अजित पवार के एक कदम ने पूरे महाराष्ट्र में हलचल पैदा कर दिया। तब बारामती सीट से उनकी चचेरी बहन सुप्रिया सुले मैदान में थीं। माना जा रहा था कि बहन के आगे अजित पवार उम्मीदवार नहीं उतारेंगे, लेकिन उन्होंने पत्नी सुनेत्रा पवार को चुनाव लड़वा दिया। उनके इस फैसले ने हर कोई हैरान रह गया।

निकाय चुनाव में चाचा शरद पवार से गिले-शिकवे दूर

इस बार निकाय चुनाव में NCP के दो गुटों में बंटने के बाद खराब हुए अजित पवार के रिश्ते, चाचा शरद पवार और बहन सुप्रिया सुले बेहतर होने लगे। दोनों गुट एक साथ मिलकर पिंपरी चिंचवड नगर निगम चुनाव में उतरे। इस चुनाव को साथ लड़ने का ऐलान खुद सुप्रिया सुले ने किया था। अजित पवार का ये फैसला भी काफी चर्चा में रहा।