Aman Sehrawat Asian Games 2026 : भारतीय पहलवान अमन सेहरावत ने एशियन गेम्स 2026 में 57 किग्रा फ्रीस्टाइल में गोल्ड जीत लिया है। बता दें कि इससे पहले इंडियन क्रिकेट टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को हराकर गोल्ड अपने नाम किया।
दिल्ली. Asian Games 2026 में भारतीय पहलवान अमन सेहरावत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों के 57 किग्रा फ्रीस्टाइल के फाइनल में गोल्ड मेडल जीत लिया है। फाइनल में उनका मुकाबला उत्तर कोरिया के हान चोंग सॉन्ग से हुआ था। उनकी इस शानदार जीत से भारत ने एशियन गेम्स में 20वां गोल्ड मेडल जीत लिया है। बता दें कि शनिवार का चौथा गोल्ड मेडल है। इससे पहले भारतीय क्रिकेट टीम ने सोना जीता है।
सेमीफाइनल में शानदार वापसी
- अमन का सेमीफाइनल मुकाबला ताजिकिस्तान के ऐयाल बेलोल्युब्स्की से हुआ। मुकाबले की शुरुआत में अमन 2-6 से पीछे चल रहे थे, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी की।
- दूसरे राउंड में अमन ने लगातार 12 अंक हासिल किए और मुकाबला 14-8 से अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ उन्होंने फाइनल में जगह पक्की कर ली।
पहले भी दिखा चुके हैं दम
अमन सेहरावत भारतीय कुश्ती के चर्चित नामों में शामिल हैं। वह पेरिस 2024 ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं। खास बात यह है कि वह पेरिस ओलंपिक में भारत के सबसे कम उम्र के ओलंपिक पदक विजेता बने थे। उस समय उनकी उम्र 21 साल और 24 दिन थी।
2023 Asian Games में भी जीता था मेडल
- अमन ने 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में पुरुषों के 57 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। अब 2026 में उनके पास इस पदक का रंग बदलने का मौका है।
- अमन ने एशियन गेम्स 2026 में अपने अभियान की शुरुआत जापान के यामातो ओगावा के खिलाफ की थी। इसके बाद उन्होंने क्वार्टर फाइनल में कजाकिस्तान के नुरदनात ऐतानोव को हराया और फिर सेमीफाइनल में शानदार वापसी करते हुए फाइनल का टिकट हासिल किया।
बचपन में माता पिता हो गया था निधन
- 16 जुलाई 2003 को हरियाणा के झज्जर जिले में जन्में अमन ने यहां तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष किया है।
- बचपन में ही 10-11 साल की उम्र में उनके माता-पिता का निधन हो गया था।
- इसके बाद उनके चाचा ने उन्हें पाला और दिल्ली के प्रसिद्ध छत्रसाल स्टेडियम पहुंचाया, जहाँ उन्होंने कुश्ती की ट्रेनिंग ली।
सुशील कुमार को देखकर सीख कुश्ती
बता दें कि अमन ने लंदन 2012 ओलंपिक में सुशील कुमार को रजत पदक जीतते देखकर कुश्ती में आने का फैसला किया। लेकिन इतने कम समय में उन्होंने व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय होने का इतिहास रचा है।


