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Arjun Prajapati: कौन है 5 साल का भारतीय जीनियस? 141 IQ, 3,000 किताबें...कनाडा में क्यों मिला इतना बड़ा सम्मान?
कनाडा में भारतीय मूल के 5 वर्षीय अर्जुन विशाल प्रजापति ने 141 IQ स्कोर हासिल किया है। Mensa और Intertel के सदस्य अर्जुन को ओंटारियो की विधानसभा में सम्मानित किया गया। जानिए उनकी पढ़ाई, उपलब्धियों और परिवार की खास परवरिश के बारे में।

Arjun Vishal Prajapati:5 साल के भारतीय जीनियस अर्जुन का कमाल
Arjun Vishal Prajapati: जिज्ञासा और सीखने की कोई उम्र नहीं होती, इस बात को महज पांच साल के एक भारतीय मूल के बच्चे ने सच साबित कर दिया है। गुजरात के वडोदरा से ताल्लुक रखने वाले और कनाडा में रहने वाले अर्जुन विशाल प्रजापति ने अपनी असाधारण बुद्धि के दम पर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हाल ही में ओंटारियो की लेजिस्लेटिव असेंबली में इस नन्हे जीनियस को उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए औपचारिक रूप से सम्मानित किया गया, जो किसी भी भारतीय परिवार के लिए बेहद गर्व का पल है।

Arjun Prajapati IQ Score: 99.7वें पर्सेंटाइल में जगह
अर्जुन की उपलब्धियों को देखते हुए ओंटारियो की प्रोविंशियल पार्लियामेंट की सदस्य मैरी-मार्गरेट मैकमोहन ने उन्हें सर्टिफिकेट ऑफ रिकग्निशन एंड अचीवमेंट दिया। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान भी उनका परिचय कराया गया। उनके परिवार को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड से बधाई पत्र मिल चुके हैं।
कॉग्निटिव असेसमेंट में अर्जुन के स्कोर इस प्रकार रहे:
- फुल स्केल IQ: 141 (99.7वां पर्सेंटाइल)
- नॉनवर्बल IQ: 149 (99.9वें पर्सेंटाइल पर या उससे ऊपर)
- फ्लूइड रीजनिंग: 144 (99.8वां पर्सेंटाइल)
- वर्किंग मेमोरी: 146 (99.9वां पर्सेंटाइल)
Mensa में आम तौर पर आबादी के शीर्ष 2 प्रतिशत में स्कोर करने वाले लोगों को सदस्यता मिलती है, जबकि Intertel का चयन मानक और अधिक सख्त है।
IQ Score 141 and Mensa Membership: चार साल की उम्र में दो बड़ी सोसाइटियों की सदस्यता
- 99.7वें पर्सेंटाइल में नाम: स्टैनफोर्ड-बिनेट इंटेलिजेंस स्केल (SB5) के तहत हुए कॉग्निटिव असेसमेंट में अर्जुन ने 141 का फुल स्केल IQ स्कोर हासिल किया, जिससे वह 99.7वें पर्सेंटाइल में पहुंच गए।
- मेंसा और इंटरटेल के मेंबर: हैरान करने वाली बात यह है कि महज चार साल की उम्र में वह दुनिया की दो सबसे प्रतिष्ठित हाई-IQ सोसाइटियों-'मेंसा' और 'इंटरटेल' के मेंबर बन चुके हैं।
- कनाडा के बड़े नेताओं की बधाई: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने भी पर्सनलाइज्ड पत्र भेजकर अर्जुन की इस अद्भुत क्षमता की तारीफ की है।
3000 Books Read at Age 5: 18 महीने की उम्र से शुरू कर दी थी किताबें पढ़ना
- किताबों का अनोखा शौक: अर्जुन के माता-पिता बताते हैं कि उसने डेढ़ साल की उम्र में ही बच्चों की किताबों के आसान शब्द पहचानना शुरू कर दिए थे। आज 5 साल की उम्र तक वह मैथ, साइंस, एस्ट्रोनॉमी, ह्यूमन एनाटॉमी और जेनेटिक्स जैसे गंभीर विषयों पर 3,000 से ज्यादा किताबें पढ़ चुका है।
- सफर में भी साथ होती हैं किताबें: अर्जुन को किताबों से इतना प्यार है कि वह कार में सफर करते वक्त भी अपने साथ किताबें रखता है। उसका मानना है कि बोर होने से बचने के लिए कम से कम एक किताब पास होनी ही चाहिए।
- हार्वर्ड और MIT का दौरा: पांच साल की उम्र में ही उसने नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से ह्यूमन फिजियोलॉजी का कोर्सवर्क पूरा किया है और हार्वर्ड तथा मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) परिसरों का दौरा भी किया है।
Foster Not Force Philosophy: माता-पिता का सीधा नियम-"थोपें नहीं, बढ़ावा दें"
- बचपन से समझौता नहीं: अर्जुन के पिता डॉ. विशाल प्रजापति (चिकित्सक) और मां महिथा थोटा (वकील) का मानना है कि बच्चे पर कभी भी पढ़ाई का बोझ या उम्मीदें नहीं थोपनी चाहिए।
- सहज जिज्ञासा को सम्मान: उनका मूल मंत्र 'Foster, Not Force' यानी बच्चे की नेचुरल जिज्ञासा को सही दिशा देना है। वे चाहते हैं कि अर्जुन अपनी इस बुद्धिमत्ता के साथ-साथ एक दयालु, खुशमिजाज और विनम्र इंसान बने।
Arjun Prajapati Parents: ‘बढ़ावा दें, थोपें नहीं’
- अर्जुन के पिता डॉ. विशाल वी. प्रजापति मूल रूप से गुजरात के वडोदरा और मां महिथा थोटा हैदराबाद से हैं। पिता चिकित्सक और क्लिनिकल रिसर्चर हैं, जबकि मां वकील हैं।
- परिवार का कहना है कि वे अर्जुन पर पढ़ाई या करियर को लेकर दबाव नहीं डालते। उनकी कोशिश उसकी जिज्ञासा और रुचियों को बढ़ावा देने की है। माता-पिता चाहते हैं कि अर्जुन अपनी उपलब्धियों के साथ एक खुश, विनम्र और संवेदनशील बच्चा भी बना रहे। उनके मुताबिक, बच्चे की पहचान सिर्फ IQ स्कोर से नहीं होनी चाहिए।
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