Assam Tea Industry Crisis: असम और पश्चिम बंगाल का चाय उद्योग बड़े संकट में है। एक तरफ बाढ़, भीषण गर्मी और कीड़ों के हमले से फसल बर्बाद हो रही है, तो दूसरी तरफ नीलामी में चाय की कीमतें लगातार गिर रही हैं। इससे उद्योग का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
Tea Price Drop: असम और पश्चिम बंगाल के चाय उद्योग के सामने इन दिनों बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (TAI) ने उद्योग की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि प्राकृतिक आपदाओं, मौसम की मार और नीलामी में लगातार गिरती कीमतों ने चाय बागान मालिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसका असर उत्पादन से लेकर निर्यात तक दिखाई दे रहा है।
बाढ़, गर्मी और कीड़ों ने बिगाड़ी फसल
एसोसिएशन के मुताबिक, असम में आई अचानक बाढ़ ने कई चाय बागानों को प्रभावित किया है। वहीं, पश्चिम बंगाल और अन्य इलाकों में अत्यधिक गर्मी और कीड़ों के प्रकोप से चाय की पत्तियों और झाड़ियों को नुकसान पहुंचा है। इन परिस्थितियों का सीधा असर जुलाई और अगस्त के उत्पादन पर पड़ा है और आने वाले महीनों में भी उत्पादन प्रभावित रहने की आशंका है।
नीलामी में लगातार गिर रहे चाय के दाम
TAI की अध्यक्ष शैलजा मेहता ने कहा कि पिछले पांच से छह हफ्तों के दौरान उत्तर भारत के प्रमुख चाय नीलामी केंद्रों पर कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। कोलकाता, गुवाहाटी और सिलीगुड़ी में नीलामी के औसत भाव में 19 रुपये से लेकर 53 रुपये प्रति किलो तक की कमी आई है। एसोसिएशन का कहना है कि बाजार में कीमतों का यह दबाव उद्योग के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
कोलकाता में सबसे बड़ी गिरावट
आंकड़ों के अनुसार, कोलकाता के CTTA में CTC चाय का औसत भाव सेल नंबर 26 में 291.27 रुपये प्रति किलो था। सेल नंबर 34 तक यह घटकर 238.77 रुपये रह गया। यानी दो महीने से भी कम समय में करीब 53 रुपये प्रति किलो या लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट हुई।
गुवाहाटी और सिलीगुड़ी भी प्रभावित
गुवाहाटी के GTAC में भी चाय के औसत दाम में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यहां कीमत 264.89 रुपये से घटकर 221.57 रुपये प्रति किलो रह गई। वहीं, सिलीगुड़ी के STAC में भाव करीब 8 प्रतिशत नीचे आया और 201.80 रुपये से घटकर 182.30 रुपये प्रति किलो हो गया।
उत्पादन में भी आई गिरावट
TAI का कहना है कि कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण जरूरत से ज्यादा सप्लाई नहीं है। टी बोर्ड इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 तक उत्तर भारत में चाय उत्पादन पिछले साल की तुलना में करीब 5 प्रतिशत अधिक था। हालांकि, इसके बाद बाढ़, गर्मी और कीड़ों के प्रकोप के कारण उत्पादन का रुझान बदल गया।
एसोसिएशन के सदस्यों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में चाय उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट आई। अगस्त में भी लगभग इतनी ही कमी का अनुमान है। इसके चलते अगस्त के अंत तक उत्तर भारत में पिछले साल की तुलना में करीब 8 मिलियन किलो कम चाय उत्पादन होने की आशंका जताई गई है।
एक्सपोर्ट में भी आई बड़ी कमी
चाय उद्योग के लिए निर्यात के मोर्चे पर भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। भू-राजनीतिक संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चाय के निर्यात पर असर पड़ा है। वर्ष 2025 में भारत ने 285.53 मिलियन किलो चाय का रिकॉर्ड निर्यात किया था, लेकिन जनवरी से जून 2026 के बीच निर्यात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 23 मिलियन किलो यानी 18 प्रतिशत कम रहा।
बढ़ती लागत ने बढ़ाई चिंता
TAI के मुताबिक, चाय उद्योग को एक तरफ प्राकृतिक आपदाओं और गिरते उत्पादन का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर नीलामी कीमतों में लगातार कमी और मजदूरी व बोनस जैसे खर्चों में बढ़ोतरी हो रही है। इन परिस्थितियों ने असम और पश्चिम बंगाल के चाय उद्योग की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है। एसोसिएशन ने आशंका जताई है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले महीनों में उद्योग के सामने संकट और गहरा सकता है।
