असम में बाढ़ से हालात गंभीर हो गए हैं। 300 मीटर लंबा पुल ढह गया, 45 हजार से अधिक लोग प्रभावित हैं। जानिए असम में हर साल बाढ़ क्यों आती है, ब्रह्मपुत्र नदी की क्या भूमिका है और सरकार राहत कार्य में क्या कदम उठा रही है।
असम एक बार फिर बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहा है। तेज बारिश और उफनती नदियों ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि 300 मीटर लंबा लोहे का पुल ढह गया, रेल सेवाएं रोकनी पड़ीं और हजारों लोगों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया। राहत और बचाव के लिए भारतीय वायुसेना भी मैदान में उतर चुकी है।

45 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित
ताजा स्थिति के अनुसार, असम के पांच जिलों में 45 हजार से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सबसे ज्यादा असर धेमाजी जिले में देखा गया है। इसके अलावा डिब्रूगढ़, चिरांग, लखीमपुर और नलबाड़ी भी बाढ़ की चपेट में हैं। सिमेन नदी पर बना करीब 300 मीटर लंबा लोहे का पुल ढहने के बाद मुर्कोंगसेलेक और शिलापाथर के बीच रेल सेवाएं रोक दी गई हैं। कई सड़कों के धंसने से राहत कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
आखिर असम में हर साल क्यों आती है बाढ़?
असम में बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। लगभग हर साल मानसून के दौरान राज्य के बड़े हिस्से जलमग्न हो जाते हैं। इसके पीछे कई प्राकृतिक और मानवीय कारण हैं।
- मानसून की भारी बारिश: जून से सितंबर के बीच असम में अत्यधिक वर्षा होती है। लगातार बारिश से नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ता है और बाढ़ की स्थिति बन जाती है।
- ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां: ब्रह्मपुत्र नदी का विशाल जलग्रहण क्षेत्र बाढ़ का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। मानसून में इसकी सहायक नदियां भी उफान पर आ जाती हैं, जिससे पानी तेजी से फैलता है।
- नदियों में गाद (सिल्ट) का जमाव: पहाड़ी इलाकों से बहकर आने वाली मिट्टी और गाद नदियों के तल में जमा हो जाती है। इससे नदी की जलधारण क्षमता कम होती है और पानी आसानी से किनारों से बाहर निकल आता है।
- वनों की कटाई: पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही वनों की कटाई से मिट्टी का कटाव बढ़ा है। यही मलबा नदियों में पहुंचकर बाढ़ की गंभीरता को और बढ़ा देता है।
- बाढ़ मैदानों में अतिक्रमण: नदी किनारे बढ़ते निर्माण, सड़कें और अनियोजित बसावट प्राकृतिक जल निकासी को बाधित करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, असम का 40 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र बाढ़ के उच्च जोखिम वाले इलाकों में आता है।
सरकार ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि लोगों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। धेमाजी के जोनाई क्षेत्र सहित कई गांवों में जलस्तर बढ़ने से लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पुनर्वास और राहत कार्य तेजी से जारी हैं तथा सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। असम की यह स्थिति एक बार फिर बताती है कि हर साल आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए केवल राहत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और वैज्ञानिक समाधान की भी उतनी ही आवश्यकता है।


