क्या राहगीर द्वारा बोरा फेंककर आरोपियों को रोकना सही कदम था, या ऐसे मामलों में लोगों को खुद दखल नहीं देना चाहिए? अगर जुनैद को पहले से दिल की बीमारी थी, तो क्या उसकी मौत को केवल हादसा माना जाना चाहिए? क्या बढ़ती मोबाइल स्नैचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून और सख्त कार्रवाई की जरूरत है?
बेंगलुरु के कब्बनपेट इलाके में 16 जून को मोबाइल छीनने की एक घटना का अंत बेहद अजीब और दुखद तरीके से हुआ। यहां मैजेस्टिक के पास एक लुटेरा फोन छीनकर भागते हुए गिर पड़ा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना 14वीं क्रॉस पर शाम करीब 5:30 बजे हुई, जिसमें स्कूटर पर सवार दो लोग शामिल थे। नागशेट्टीहल्ली के रहने वाले वकील बसवराजू एम. अपने फोन पर किसी ऑफिस का लोकेशन देख रहे थे। तभी आरोपियों ने कथित तौर पर उनका फोन छीन लिया और भागने लगे। बसवराजू ने शोर मचाया और उनके पीछे भागे।

उनकी भागने की कोशिश तब नाकाम हो गई, जब एक राहगीर ने उनकी स्कूटर पर एक भारी बोरा फेंक दिया। इससे दोनों का बैलेंस बिगड़ा और वे गिर पड़े। इसी दौरान छीना हुआ फोन भी उनके हाथ से छूट गया।
राहगीर के दखल ने बदला मामला
इसके बाद दोनों आरोपी स्कूटर छोड़कर करीब 250 मीटर तक दौड़े। उनमें से एक, 18 साल का जुनैद, एक खड़ी बाइक के पास अचानक गिर गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उसके 23 साल के साथी अरबाज को पुलिस ने पकड़ लिया। बाद में जुनैद के माता-पिता ने अधिकारियों को बताया कि वह दिल का मरीज था और उसकी कोरोनरी आर्टरी में एक स्टेंट भी लगा हुआ था। पुलिस ने भी पुष्टि की कि जुनैद का यह पहला अपराध था, जबकि अरबाज एक शातिर मोबाइल स्नैचर और गाड़ी चोर है।
बसवराजू की शिकायत के आधार पर, BNS की धारा 304 (छीनैती) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जुनैद की मौत के बाद, पुलिस ने उल्सूर गेट स्टेशन में अप्राकृतिक मौत का मामला भी दर्ज किया है।
