Bhadohi Hospital Case: भदोही के ज्ञानपुर जिला अस्पताल के गेट पर 20 वर्षीय महिला का प्रसव हुआ। मामले की जांच के बाद डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई हुई, जबकि भेदभाव के आरोप भी चर्चा में हैं।

भदोही के ज्ञानपुर में अस्पताल के बाहर सड़क किनारे एक महिला के प्रसव का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। 20 वर्षीय रानी देवी प्रसव पीड़ा में महाराजा चेत सिंह जिला अस्पताल पहुंची थीं। बाद में अस्पताल के गेट के बाहर ही महिलाओं ने चादर की ओट बनाकर उनका प्रसव कराया। मामला सामने आने के बाद जांच हुई और स्वास्थ्य विभाग ने कई कर्मचारियों पर कार्रवाई की।

अस्पताल पहुंची महिला, फिर सड़क पर हुआ प्रसव

रिपोर्टों के अनुसार, जोरई गांव की रानी देवी को प्रसव पीड़ा के दौरान जिला अस्पताल लाया गया था। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, महिला में गंभीर एनीमिया था और उसे उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किए जाने की बात सामने आई। इसी दौरान परिवार महिला को लेकर अस्पताल से बाहर निकला और अस्पताल गेट के पास ही उसका प्रसव हो गया।

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परिजनों ने लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप

महिला के परिजनों ने आरोप लगाया कि स्टाफ नर्स ने उसके मुसहर समुदाय से होने का हवाला देते हुए प्रसव कराने से इनकार किया। कांग्रेस ने भी वायरल वीडियो साझा करते हुए इसी आरोप को उठाया। हालांकि, जातिगत भेदभाव के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मामले में चिकित्सा लापरवाही की जांच की गई है।

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जांच के बाद कई कर्मचारियों पर कार्रवाई

चार सदस्यीय जांच के बाद इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. पंकज कुमार की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की गई। स्टाफ नर्स नीलम मौर्या पर भी कार्रवाई हुई, जबकि स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति का वेतन रोकने और सीएमएस तथा एक अन्य महिला चिकित्सक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई। (

जच्चा-बच्चा को बाद में अस्पताल में कराया भर्ती

घटना की जानकारी मिलने के बाद सीएमओ डॉ. एसके चक ने महिला और नवजात को अस्पताल में भर्ती कराया। रिपोर्टों के मुताबिक, महिला को उपचार दिया गया और जच्चा-बच्चा को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। शुरुआती रिपोर्टों में दोनों की हालत स्थिर बताई गई।

अस्पताल व्यवस्था पर उठे कई सवाल

इस घटना ने सिर्फ एक मरीज की देखभाल नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी रिस्पॉन्स, रेफरल व्यवस्था और मरीज को समय पर प्राथमिक चिकित्सा मिलने जैसे सवालों को भी सामने ला दिया है। जांच में लापरवाही पाए जाने के बाद हुई कार्रवाई से मामला आगे बढ़ा है। वहीं, जातिगत भेदभाव के आरोपों पर उपलब्ध आधिकारिक निष्कर्ष अलग से महत्वपूर्ण होंगे।

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