भूटान के हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल झील फटने (GLOF) के कारण असम और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में बाढ़ का भयंकर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर आपदा टीमों को तैनात कर दिया है। जानें पूरी जानकारी।
Himalayan Glacier Melt: भूटान के हिमालयी क्षेत्र में एक बार फिर बड़ा प्राकृतिक खतरा मंडरा रहा है। वहां एक ग्लेशियल झील फटने (GLOF) से भारत के दो राज्यों असम और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में अचानक बाढ़ का भारी संकट खड़ा हो गया है। इस घटना के बाद से दोनों राज्यों में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। लगातार बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के चलते हिमालय की ये झीलें बेहद संवेदनशील हो चुकी हैं, जो कभी भी बड़ी तबाही का कारण बन सकती हैं।
भूटान में ग्लेशियल झील फटने से असम-बंगाल में क्यों मंडराया बाढ़ का खतरा?
भूटान के ऊपरी हिमालयी इलाकों में स्थित मोरैन झील (Moraine Lake) में तापमान बढ़ने के कारण अचानक एक खतरनाक दरार आ गई। इसे ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है। इस आपदा के कारण लाखों क्यूबिक मीटर पानी और मलबा अचानक नीचे की ओर बह निकला है, जो सीधे ब्रह्मपुत्र घाटी और पश्चिम बंगाल के उत्तरी 'डुअर्स' क्षेत्र की नदियों में आ मिला है। पानी का यह बहाव इतना तेज है कि निचले इलाकों में कभी भी फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) आ सकती है।
Bhutan GLOF: कैसे फटी ग्लेशियल झील, क्यों बढ़ा बाढ़ का खतरा?
भूटान के ऊंचाई वाले हिमालयी इलाके में ग्लेशियल झील के फटने से भारी मात्रा में पानी और मलबा नदी प्रणालियों में पहुंचने की आशंका जताई गई है। इसका असर उन नदियों पर पड़ सकता है, जो आगे चलकर असम की ब्रह्मपुत्र घाटी और पश्चिम बंगाल के उत्तरी डुआर्स क्षेत्र से होकर गुजरती हैं।
- बढ़ते तापमान के कारण हिमालयी ग्लेशियर तेजी से पीछे हट रहे हैं।
- ग्लेशियरों के पिघलने से ऊंचाई पर बनी झीलों में पानी जमा होता जा रहा है।
- इन झीलों को रोकने वाले बर्फ और मिट्टी-मलबे के प्राकृतिक बांध कमजोर पड़ने पर अचानक टूट सकते हैं।
- झील फटने के बाद कुछ ही घंटों में लाखों क्यूबिक मीटर पानी नीचे की ओर बह सकता है। इसके साथ भारी मात्रा में मलबा भी आता है।
Assam Flood Alert: इन चार जिलों में जारी हुई चेतावनी
असम के निचले इलाकों में अचानक बाढ़ और नदी किनारों के कटाव का खतरा देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। राज्य के चार सीमावर्ती जिलों को खास तौर पर सतर्क रहने को कहा गया है।
- कोकराझार: नदी के जलस्तर और आसपास के निचले इलाकों पर नजर रखी जा रही है।
- बक्सा: संवेदनशील नदी किनारों पर आपदा प्रबंधन की टीमें तैनात हैं।
- चिरांग: जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है।
- धुबरी: नदियों के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है।
West Bengal Flood Warning: जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार हाई अलर्ट पर
- पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में डुआर्स क्षेत्र की नदियों में पानी बढ़ने की आशंका है। प्रशासन ने जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों में निगरानी व्यवस्था मजबूत की है।
- नदियों के संवेदनशील हिस्सों पर आपदा प्रबंधन टीमों को तैनात किया गया है।
- जलस्तर और पानी के बहाव की लगातार निगरानी के लिए कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।
- नदी किनारे रहने वाले लोगों को नदी तल से दूर रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी रखने को कहा गया है।
Himalayan GLOF Risk: अगस्त की बाढ़ के बाद फिर बढ़ी चिंता
- यह घटनाक्रम अगस्त 2026 में नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सामने आया है। उस आपदा में पहाड़ी ढलानों के धंसने और ग्लेशियल झीलों से अचानक पानी निकलने के कारण भारी मात्रा में मलबा बहा था। सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा था और बाढ़ का पानी भारत की ओर आया था।
- लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं पूर्वी हिमालय के नाजुक पर्यावरण और वहां रहने वाली आबादी के लिए गंभीर चुनौती हैं। GLOF का खतरा इसलिए भी अधिक है, क्योंकि झील टूटने और पानी नीचे पहुंचने के बीच बहुत कम समय मिल सकता है। ऐसे में समय पर चेतावनी, नदी के जलस्तर की निगरानी और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना बेहद अहम है।






