British Slavery Apology: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम गुलामी के इतिहास पर औपचारिक माफी की मांग सुनने को तैयार हैं। लेकिन ब्रिटेन ने आर्थिक मुआवजा देने से इनकार कर दिया है। जानिए पूरा मामला।

ब्रिटेन के इतिहास का एक ऐसा अध्याय फिर से चर्चा में है, जिसे लेकर दशकों से सवाल उठते रहे हैं। कभी दुनिया के बड़े हिस्से पर राज करने वाले ब्रिटेन पर अब उसके औपनिवेशिक अतीत को लेकर दबाव बढ़ रहा है। मामला अफ्रीकी और कैरेबियाई देशों के लाखों लोगों को गुलाम बनाकर बेचने से जुड़ा है। अब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम इस मुद्दे पर औपचारिक बातचीत और माफी की मांगों पर विचार करने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने आर्थिक मुआवजा देने की मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया है।

किन देशों के लिए माफी की उठ रही मांग?

15वीं से 19वीं शताब्दी के बीच चले ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार में करीब 1.25 करोड़ अफ्रीकी लोगों को जबरन उनके घरों से उठाकर अटलांटिक पार ले जाया गया। इस व्यापार में ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय शक्तियां शामिल थीं। गिनी, नाइजीरिया, घाना, बेनिन, टोगो, कैमरून, अंगोला, सिएरा लियोन, गांबिया, सेनेगल और डीआर कांगो जैसे देशों के लोगों पर इसका गहरा असर पड़ा। प्रभावित देशों और समुदायों की मांग है कि ब्रिटेन अपने ऐतिहासिक अपराधों को स्वीकार करे।

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एंडी बर्नहैम ने क्या बनाया है माफी का प्लान?

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने प्रभावित देशों के साथ एक औपचारिक संवाद शुरू करने की पहल की है। उनका कहना है कि ब्रिटेन को इस इतिहास से जुड़े लोगों की बातें सुननी चाहिए और माफी की मांग पर भी चर्चा होनी चाहिए। द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉमनवेल्थ शिखर सम्मेलन के दौरान इस बातचीत को आगे बढ़ाया जाएगा। ब्रिटेन चाहता है कि माफी का स्वरूप प्रभावित देश और समुदाय अपनी बात रखकर तय करने में मदद करें।

मुआवजा देने से ब्रिटेन ने क्यों किया इनकार?

माफी की संभावना के बावजूद ब्रिटेन ने आर्थिक मुआवजे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। बर्नहैम का तर्क है कि आज की पीढ़ी को सदियों पहले हुए अपराधों के लिए आर्थिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, ब्रिटेन गरीब कॉमनवेल्थ देशों के कर्ज का बोझ कम करने के लिए कर्ज पुनर्गठन और बेहतर भुगतान शर्तों पर काम करने की योजना बना रहा है।

कॉमनवेल्थ सम्मेलन से पहले क्यों बढ़ी हलचल?

एंडी बर्नहैम का यह कदम ऐसे समय आया है, जब कैरेबियाई देश गुलामी के लिए ब्रिटेन से माफी और मुआवजे की मांग तेज कर रहे हैं। नवंबर 2026 में एंटीगुआ और बारबुडा में कॉमनवेल्थ देशों का शिखर सम्मेलन हो रहा है। ब्रिटेन के लिए कॉमनवेल्थ देशों के साथ रिश्ते मजबूत रखना भी अहम है। ऐसे में गुलामी का मुद्दा सम्मेलन में कूटनीतिक चुनौती बन सकता है।

टोनी ब्लेयर भी जता चुके हैं अफसोस

ब्रिटेन में गुलामी के इतिहास को लेकर पहले भी माफी की मांग उठती रही है। 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने दास व्यापार पर गहरा दुख जताया था, लेकिन औपचारिक माफी नहीं मांगी थी। अब बर्नहैम सरकार के सामने चुनौती है कि वह ऐतिहासिक गलतियों को स्वीकार करने और आर्थिक मुआवजे से बचने के बीच संतुलन कैसे बनाती है। प्रभावित देशों के लिए सिर्फ अफसोस जताना पर्याप्त नहीं है, वे ऐतिहासिक अन्याय की भरपाई भी चाहते हैं।

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