Online Bribery Police Case: चित्रकूट में ओवरलोड ट्रकों की कार्रवाई के दौरान ऑनलाइन वसूली के आरोप में कोतवाली प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई ने विभाग में हलचल मचा दी है, जांच जारी है।
चित्रकूट में ओवरलोड ट्रकों पर कार्रवाई के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे के अंदर हलचल मचा दी है। आमतौर पर सड़क पर होने वाली चेकिंग अब डिजिटल ट्रांजैक्शन के आरोप तक पहुंच गई है। सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता का भी उठ रहा है।
Chitrakoot में कुछ दिन पहले दो ओवरलोड ट्रकों को पकड़ा गया। यही से पूरे विवाद की शुरुआत हुई। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान प्रभारी निरीक्षक श्याम प्रताप पटेल ने एक दुकानदार के खाते में करीब 90 हजार रुपये ऑनलाइन मंगवाए। जैसे ही यह बात बाहर आई, मामला तेजी से फैल गया और विभाग को तुरंत जांच के आदेश देने पड़े।
SP ने दिखाई सख्ती, देर रात लिया बड़ा फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए Arun Kumar Singh ने बिना देरी किए सख्त कदम उठाया। प्राथमिक जांच के आधार पर प्रभारी निरीक्षक श्याम प्रताप पटेल को बुधवार देर रात लाइन हाजिर कर दिया गया। यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि विभाग अब ऐसे मामलों में तुरंत एक्शन लेने के मूड में है।
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जांच में क्या मिला? ‘प्रथम दृष्टया’ आरोप क्यों माने गए गंभीर
विभागीय जांच के दौरान शुरुआती स्तर पर ही आरोपों को गंभीर माना गया। हालांकि अभी तक पूरी रिपोर्ट सामने नहीं आई है, लेकिन इतना जरूर साफ है कि मामले को हल्के में नहीं लिया जा रहा। पुलिस अधिकारी लगातार संबंधित पक्षों से पूछताछ कर रहे हैं, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।
ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई के दौरान अवैध वसूली की शिकायतें पहले भी आती रही हैं। लेकिन इस बार मामला इसलिए अलग है, क्योंकि इसमें ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का एंगल जुड़ा हुआ है।डिजिटल पेमेंट के जरिए कथित वसूली का आरोप पुलिस की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर रहा है।
कोतवाली में फिलहाल कौन संभाल रहा जिम्मेदारी?
सदर कोतवाली में नए प्रभारी की नियुक्ति अभी तक नहीं की गई है। ऐसे में थाने का कामकाज फिलहाल अन्य अधिकारियों के जरिए चलाया जा रहा है। यह स्थिति अस्थायी जरूर है, लेकिन इससे यह भी संकेत मिलता है कि विभाग जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है।
पुलिस विभाग की इस कार्रवाई को एक सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। यह साफ संकेत है कि अगर किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो कार्रवाई तय है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच के अंतिम नतीजे क्या निकलते हैं और आगे किस तरह की कार्रवाई होती है।
नजरें जांच रिपोर्ट पर, आगे क्या होगा?
फिलहाल यह मामला जांच के दौर में है। अगर आरोप साबित होते हैं, तो आगे और कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है। चित्रकूट का यह मामला सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक संकेत है कि पारदर्शिता और जवाबदेही अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है।
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