जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने और प्रदर्शन करने के मामले में CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रंका को कोर्ट से जमानत मिल गई है। उन्होंने कोर्ट में लिखित वादा किया है कि जब तक कानूनी अनुमति नहीं मिलती, वे वहां कोई प्रदर्शन नहीं करेंगे। जानिए पूरी खबर।

CJP Leaders: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद बुधवार को आखिरकार जेल से रिहा कर दिया गया। दोनों ने नई दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत में लिखित वचन दिया कि जंतर-मंतर को दोबारा आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की मान्यता मिलने तक वे वहां किसी विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। हालांकि, दोनों के खिलाफ जांच अभी जारी रहेगी।

CJP Leaders Release: 50-50 हजार रुपये के बॉन्ड पर मिली रिहाई

  • अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रंका को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानत बांड पर रिहा करने का आदेश दिया।
  • दोनों ने शांति भंग नहीं करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिया।
  • उन्होंने न्यायपालिका और उसकी प्रक्रियाओं में विश्वास जताया।
  • लिखित वचन में कहा गया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की मान्यता बहाल होने तक वहां प्रदर्शन नहीं बुलाया जाएगा।
  • यह भी कहा गया कि भविष्य में कोई प्रदर्शन हुआ तो वह संविधान और कानून के दायरे में होगा।
  • मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।
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Jantar Mantar Protest: बंद गेट फांदकर फहराया था तिरंगा

  • दास और रंका 14 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में थे। इससे एक दिन पहले, 13 अक्टूबर को दोनों ने जंतर-मंतर के बंद गेट को फांदकर वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। यह कार्रवाई जंतर-मंतर की प्रदर्शन स्थल के तौर पर मान्यता खत्म किए जाने के विरोध में की गई थी।
  • पुलिस के मुताबिक, इस घटना से उस शांति बांड के उल्लंघन का मामला बना, जिस पर दोनों ने 10 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद हस्ताक्षर किए थे। उस समय CJP ने कथित चुनावी धांधली के आरोपों को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था।
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Delhi High Court: 'आप सबसे आगे हैं, बाकी लोग भी ऐसा कर सकते हैं'

  • CJP की ओर से कार्यवाही में देरी का आरोप लगाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने बॉन्ड के उल्लंघन और प्रदर्शनकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए।
  • कोर्ट ने कहा कि जब प्रदर्शन में आगे रहने वाले लोग बैरिकेड तोड़ते हैं तो बाकी लोगों के भी ऐसा करने की संभावना बढ़ जाती है। अदालत ने विदेशों में छात्रों के आंदोलनों के हिंसक घटनाओं में बदलने का उदाहरण भी दिया। इसी दौरान बेंच ने दोनों नेताओं की उम्र पूछी। उम्र 27 और 31 साल बताए जाने पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि वे 'Gen Z' नहीं हैं।

CJP Protest: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

CJP अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। संगठन का आरोप है कि चुनाव आयोग ने एकतरफा तरीके से काम किया और मतदाता सूची के Special Intensive Revision में अनियमितताएं हुईं। यही मुद्दा राहुल गांधी के नेतृत्व वाला विपक्ष भी उठा रहा है।