Dr Heera Rashid On Rashid: डॉ. हिरा राशिद ने जेवर एयरपोर्ट और अपने संघर्ष के बारे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से क्या कहा? एयरपोर्ट निर्माण के लिए परिवार की जमीन जाने के बाद हिरा राशिद ने मुआवजे की राशि का कैसे उपयोग किया? जेवर एयरपोर्ट की पहली टेस्ट फ्लाइट में किसानों को शामिल करने का क्या महत्व है?

Noida International Airport: कुछ कहानियां केवल विकास की नहीं होतीं, बल्कि बदलाव और सपनों के सच होने की मिसाल बन जाती हैं। उत्तर प्रदेश के जेवर में भी 15 जून का दिन कुछ ऐसा ही रहा। जिन खेतों में कभी किसानों के परिवार अपनी आजीविका के लिए फसलें उगाते थे, उसी धरती से देश के सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पहली टेस्ट फ्लाइट ने उड़ान भरी।

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इस ऐतिहासिक अवसर को और भी खास तब बना दिया गया, जब पहली टेस्ट फ्लाइट में सफर करने का मौका उन किसानों को मिला, जिन्होंने एयरपोर्ट निर्माण के लिए अपनी जमीन दी थी। यह सिर्फ एक विमान की उड़ान नहीं थी, बल्कि विकास और विश्वास की उस यात्रा का प्रतीक थी, जिसमें किसानों ने अपनी जमीन देकर भविष्य के नए रास्ते खोले।

जेवर से लखनऊ तक का सफर बना सम्मान की उड़ान

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने के बाद किसानों का यह विशेष दल सीधे लखनऊ पहुंचा। यहां किसानों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और एयरपोर्ट की पहली उड़ान का अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान कई किसान भावुक दिखाई दिए। वर्षों पहले जिस परियोजना के लिए उन्होंने अपनी जमीन दी थी, उसी परियोजना की पहली उड़ान का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व और संतोष का क्षण था।

जब डॉक्टर हीरा राशिद ने सुनाई संघर्ष से सफलता तक की कहानी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संवाद के दौरान जेवर की रहने वाली डॉ. हीरा राशिद की कहानी ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उन्होंने बताया कि जिस जमीन पर कभी उनके पिता खेती करते थे, आज उसी जमीन से उड़ान भरकर वह मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची हैं।

डॉ. हीरा राशिद ने कहा कि कुछ वर्ष पहले उनके क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी थी। बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी, शिक्षा व्यवस्था और परिवहन सुविधाएं सीमित थीं। लेकिन समय के साथ क्षेत्र में विकास कार्य हुए और परिस्थितियां बदलने लगीं। उन्होंने बताया कि बिना किसी कोचिंग के वर्ष 2021 में उन्होंने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और आज एक डॉक्टर के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।

मुआवजे की रकम को बनाया सफलता का जरिया

डॉ. हीरा राशिद की सफलता के पीछे त्याग और दूरदर्शिता की कहानी भी छिपी है। एयरपोर्ट परियोजना के लिए उनके परिवार की लगभग छह बीघा जमीन अधिग्रहित की गई थी। जमीन के बदले मिले मुआवजे को परिवार ने केवल आर्थिक लाभ के रूप में नहीं देखा, बल्कि उसे शिक्षा और भविष्य निर्माण का माध्यम बनाया। हीरा राशिद ने अपने सपनों को साकार करने के लिए इस अवसर का उपयोग किया और चिकित्सा शिक्षा हासिल कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया। उनकी कहानी यह दिखाती है कि विकास परियोजनाएं केवल ढांचागत परिवर्तन ही नहीं लातीं, बल्कि सही दिशा मिलने पर लोगों के जीवन की दिशा भी बदल सकती हैं।

मुख्यमंत्री से कही बड़ी बात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत के दौरान डॉ. हीरा राशिद ने उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में हुए विकास कार्यों ने युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को लेकर अपनी व्यक्तिगत इच्छा भी व्यक्त की, जिसने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

किसानों के सपनों को मिली नई ऊंचाई

जेवर एयरपोर्ट की पहली टेस्ट फ्लाइट कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। यह परियोजना केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े विमानन बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रमों में शामिल है। इस उड़ान में किसानों की भागीदारी ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि किसी भी बड़े विकास कार्य की वास्तविक नींव उन लोगों के योगदान पर टिकी होती है, जो अपनी जमीन, संसाधन और विश्वास के साथ उसमें भागीदार बनते हैं।