कर्नाटक में कांग्रेस की गारंटी योजनाओं पर चुनाव आयोग ने रोक लगा दी है। आचार संहिता उल्लंघन के चलते फंड वितरण पर जवाब मांगा गया है। कांग्रेस ने इसे बीजेपी की साजिश बताया है।
बेंगलुरु: कर्नाटक में उपचुनाव से ठीक पहले कांग्रेस सरकार की मशहूर 'गारंटी योजनाओं' पर बवाल मच गया है। केंद्रीय चुनाव आयोग ने इन योजनाओं के तहत फंड बांटने को आचार संहिता का उल्लंघन माना है। आयोग ने गुरुवार को होने वाले मतदान से पहले पैसे बांटने को लेकर राज्य की चीफ सेक्रेटरी शालिनी रजनीश से जवाब मांगा है। चुनाव आयोग ने यह चिट्ठी 2 अप्रैल को भेजी थी, लेकिन कांग्रेस ने मंगलवार को इसे जारी किया, जिसके बाद यह मामला गरमा गया।
आयोग ने पाया कि गृह लक्ष्मी, युवा निधि, शक्ति, गृह ज्योति और अन्न भाग्य जैसी पांच गारंटी योजनाओं के तहत दावणगेरे और बागलकोट जिलों में लाभार्थियों को नए सिरे से पैसे दिए गए। चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान आयोग की पहले से इजाज़त लिए बिना ऐसा कोई भी फंड ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। चिट्ठी में साफ लिखा है कि यह बताया जाए कि किन अधिकारियों ने फंड जारी करने का आदेश दिया। साथ ही, अगर पैसा अभी तक ट्रांसफर नहीं हुआ है, तो आयोग की मंजूरी के बिना इसे न बांटा जाए।
बीजेपी की साजिश: कांग्रेस
वहीं, राज्य के डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार ने इसके पीछे बीजेपी की साजिश होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह बीजेपी की गरीबों और बेरोजगार युवाओं को मिलने वाले फायदे रोकने की कोशिश है। अधिकारियों से मीटिंग के बाद शिवकुमार ने मीडिया से कहा कि मार्च महीने की किस्तें समय पर दी जा चुकी हैं और इस महीने का पैसा चुनाव के बाद ही बांटा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की इस कार्रवाई का वोटर सही जवाब देंगे।
