फरीदाबाद में एक सरकारी अस्पताल का मेन गेट बंद होने की वजह से एक महिला को आधी रात में पार्क में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा. परिवार मदद के लिए चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन कोई भी मेडिकल स्टाफ मदद के लिए आगे नहीं आया.
मेडिकल लापरवाही का एक हैरान करने वाला मामला फरीदाबाद से सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक सरकारी अस्पताल का मेन गेट बंद होने के कारण एक महिला को आधी रात में अस्पताल के पार्क में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। इस दौरान परिवार मदद के लिए चीखता रहा, लेकिन कोई भी डॉक्टर या स्टाफ मदद के लिए आगे नहीं आया। यह शर्मनाक घटना शनिवार तड़के सेक्टर 3 के 30 बेड वाले फर्स्ट रेफरल यूनिट अस्पताल की है। बड़ौली गांव की रहने वाली बालेश नाम की महिला को लेबर पेन शुरू होने पर अस्पताल लाया गया था।

परिवार वालों के मुताबिक, वे सबसे पहले अस्पताल के मेन गेट पर पहुंचे, लेकिन वो बंद था। बार-बार गेट खटखटाने और मदद के लिए चिल्लाने के बावजूद कोई डॉक्टर, नर्स या अस्पताल का स्टाफ बाहर नहीं आया। बालेश ने बताया कि इसके बाद परिवार ने पीछे का एक और गेट ढूंढा, जो खुला हुआ था, और मदद की तलाश में परिसर में दाखिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि तब भी कोई डॉक्टर, नर्स या सपोर्ट स्टाफ उनकी मदद के लिए नहीं आया।
जब लेबर पेन बहुत तेज हो गया और इमरजेंसी में कोई मदद मिलती नहीं दिखी, तो आखिरकार अस्पताल के पार्क में ही बच्चे का जन्म हुआ। परिवार की एक तजुर्बेकार रिश्तेदार ने टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी कराई। इसके बाद मां और नवजात को अस्पताल के अंदर शिफ्ट किया गया। बालेश ने आगे कहा, "मेरे पति और देवर अस्पताल के अंदर मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन कोई स्टाफ नहीं आया। जब तक मदद पहुंची, तब तक डिलीवरी हो चुकी थी।"
बालेश के साथ आए चमन चंदीला ने बताया, "परिवार की ही एक महिला ने डिलीवरी कराई, जिन्हें बच्चे के जन्म को संभालने का कुछ अनुभव था।" महिला ने अपने तीसरे बेटे को जन्म दिया है। जिला डिप्टी सिविल सर्जन डॉ। रचना ने कहा कि मरीज पूरी तरह से डायलेटेड हालत में आई थी और कुछ ही मिनटों में डिलीवरी हो गई। उन्होंने कहा, "रात में ओपीडी का गेट बंद था, हालांकि इमरजेंसी सेवाओं के लिए दूसरा गेट खुला था। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि डिलीवरी अस्पताल के बाहर हुई।"
इस घटना के बाद मचे हंगामे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने पुष्टि की कि अस्पताल में कमियां थीं। एक अधिकारी यादव ने कहा, "मुद्दा रात में एक कर्मचारी और एक स्टाफ नर्स की गैर-मौजूदगी का था। मरीज के घरवालों ने कहा कि ढूंढने पर भी वे नहीं मिले।"
यादव ने बताया कि अस्पताल रात में एक गेट बंद रखता था, लेकिन अब दोनों गेट खुले रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, "मेन रोड की एंट्री रात में खुली रहनी चाहिए, जबकि ओपीडी वाला हिस्सा बैरिकेड रहेगा। हमने दो स्टाफ को दोषी पाया और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है।"
हरियाणा सरकार ने गर्भवती महिलाओं की बेहतर निगरानी और इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं को मजबूत करने के लिए अगले एक-दो महीने में एक मैटरनल और इन्फेंट मोर्टेलिटी “वॉर रूम” बनाने की भी घोषणा की है।
