शताब्दी ट्रेन में एक यात्री ने सह-यात्री द्वारा सीट पर अतिक्रमण का ट्वीट किया। इस वायरल पोस्ट ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट में शिष्टाचार पर बहस छेड़ दी, जिस पर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर के दौरान शिष्टाचार और तमीज को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। वजह बना है गुरुग्राम के एक शख्स का ट्वीट, जो अब वायरल हो चुका है। गुरजोत अहलूवालिया नाम के इस शख्स ने शताब्दी ट्रेन में सफर के दौरान अपने बगल में बैठे एक यात्री पर उनकी सीट में घुसने का आरोप लगाया। उन्होंने X पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें दिख रहा है कि कैसे बगल वाला यात्री पैर फैलाकर बैठा है और उनका पैर गुरजोत की सीट की तरफ आ रहा है।

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गुरजोत ने अपनी पोस्ट में लिखा, “शताब्दी में सफर कर रहा हूं और मेरे बगल में बैठे ये बुद्धिमान व्यक्ति पिछले 30 मिनट से पैर फैलाकर मेरी जगह में घुस रहे हैं। भारत में ऐसे 'पढ़े-लिखे जाहिलों' की बेवकूफी भरी सिविक सेंस से कैसे निपटा जाए?”

यह पोस्ट प्लेटफॉर्म पर आते ही तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने इस पर अपनी राय दी और बस, ट्रेन और हवाई जहाज में अपने ऐसे ही बुरे अनुभवों को साझा किया। गुरजोत ने एक और पोस्ट में लिखा कि वह शांत रहने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हालात उनके सब्र का इम्तिहान ले रहे थे।

उन्होंने लिखा, “या तो मैं गलत था या इस आदमी ने मेरी पोस्ट देख ली। लेकिन अगर इनके गंदे जूते एक बार भी मुझसे छू गए, तो मैं अपना आपा खो दूंगा!” हालांकि, मामला ज्यादा बिगड़ा नहीं। गुरजोत ने एक और पोस्ट में बताया कि जैसे ही चाय और खाना परोसा जाने लगा, वह यात्री ठीक से बैठ गया।

देखिए वायरल पोस्ट

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लोगों ने क्या कहा?

इस पोस्ट पर इंटरनेट यूजर्स की राय बंटी हुई थी। कुछ लोगों ने गुरजोत से सहमति जताते हुए कहा कि सार्वजनिक जगहों पर दूसरों का सम्मान करना जरूरी है, वहीं कुछ का मानना था कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बजाय यात्री से विनम्रता से बात करके मामला सुलझाया जा सकता था।

एक यूजर ने लिखा, “इसीलिए सिविक सेंस को स्कूल से ही सिखाया जाना चाहिए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट एक साझा जगह है, आपका अपना लिविंग रूम नहीं।” एक अन्य ने कहा, “बस उनसे विनम्रता से ठीक से बैठने के लिए कह देते। ज्यादातर लोगों को तो पता भी नहीं चलता कि वे दूसरों को परेशान कर रहे हैं।”

एक तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, “पढ़े-लिखे लोगों का ऐसा बर्ताव करना एक बड़ी समस्या है। डिग्रियों से तमीज नहीं आती।” एक और प्रतिक्रिया में लिखा था, “यह ट्रेनों, उड़ानों और यहां तक कि थिएटरों में भी होता है। लोग भूल जाते हैं कि दूसरों ने भी अपनी सीट के लिए पैसे दिए हैं।”