HAL के तेजस-एमके1ए विमानों की डिलीवरी में 2 साल से अधिक की देरी हुई है। इंजन व सॉफ्टवेयर समस्याओं के चलते अब अगस्त-सितंबर 2024 से डिलीवरी का नया वादा है। वायुसेना पूरी तरह सर्टिफाइड विमान ही स्वीकार करेगी।

नई दिल्ली: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नए चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रवि कोटा ने इंडियन एयरफोर्स (IAF) के चीफ, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह से मुलाकात की है। इस मीटिंग में उन्होंने लंबे समय से अटके हुए तेजस-एमके1ए हल्के लड़ाकू विमान की डिलीवरी का नया शेड्यूल पेश किया।

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रक्षा सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली में हुई इस बैठक में इस प्रोग्राम को लेकर बढ़ती urgencу साफ दिखी, जो 2021 के ऐतिहासिक कॉन्ट्रैक्ट के बाद से लगातार अपने टारगेट से चूक रहा है। HAL ने वादा किया है कि वह इस साल अगस्त से सितंबर के बीच डिलीवरी शुरू कर देगी। जबकि असली शेड्यूल के हिसाब से, अब तक वायुसेना के पास तेजस-एमके1ए जेट की दो पूरी स्क्वाड्रन होनी चाहिए थीं। इस प्रोग्राम में दो साल से ज्यादा की देरी हो चुकी है और मई के मध्य तक एक भी विमान वायुसेना को नहीं सौंपा गया है। जबकि रिपोर्ट्स के मुताबिक, HAL के पास 20 से ज्यादा एयरफ्रेम और छह GE F404 इंजन पहले से ही मौजूद हैं।

नए चीफ, पुरानी समस्या

रवि कोटा को रक्षा क्षेत्र में तेजस प्रोग्राम के साथ लंबे जुड़ाव के कारण "LCA मैन" के तौर पर जाना जाता है। लेकिन HAL के टॉप पद पर उनकी नियुक्ति एक बड़े इम्तिहान के साथ हुई है। जिस संस्था को वह अब लीड कर रहे हैं, वह पिछले तीन सालों से देश की वायुसेना से किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रही है।

HAL और वायुसेना के सीनियर अधिकारियों के बीच एक औपचारिक प्रोग्राम रिव्यू मीटिंग जून 2026 के लिए तय की गई है। इसमें वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ, एयर मार्शल एके भारती और टेस्ट पायलट भी शामिल होंगे। यह मीटिंग पिछले महीने होनी थी।

इस मीटिंग का मुख्य एजेंडा एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार को विमान के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के साथ जोड़ना, मिसाइल फायरिंग ट्रायल्स को पूरा करना और पूरे वेपन पैकेज का सर्टिफिकेशन होगा। वायुसेना ने साफ कर दिया है कि इनमें से किसी भी चीज को ऑप्शनल नहीं माना जाएगा। ऑपरेशनल सर्विस में किसी भी विमान को शामिल करने से पहले इन सभी को सर्टिफाइड होना जरूरी है।

कैसे फिसलती गईं डेडलाइन

IAF ने फरवरी 2021 में 83 तेजस-एमके1ए फाइटर जेट्स के लिए 48,000 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। यह उस समय भारत के इतिहास की सबसे बड़ी स्वदेशी रक्षा खरीद थी। डिलीवरी मार्च 2024 तक शुरू होनी थी। पहली बार देरी तब हुई जब जनरल इलेक्ट्रिक (GE) से F404-IN20 इंजनों की सप्लाई में रुकावट आई, जिससे डिलीवरी की तारीख मार्च 2025 तक बढ़ गई।

इसके बाद सॉफ्टवेयर वैलिडेशन की चुनौतियों और रडार ट्रायल्स के पूरा न होने के कारण दूसरी बार देरी हुई, जिससे टारगेट मार्च 2026 से भी आगे खिसक गया। अब 83 विमानों के पूरे ऑर्डर की डिलीवरी 2031 तक बढ़ा दी गई है। इंजन की उपलब्धता अभी भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है। GE, मार्च 2026 में F404-IN20 इंजनों की बैच की डिलीवरी का एक अहम टारगेट चूक गई, जिसका सीधा असर HAL की प्रोडक्शन लाइन पर पड़ा।

इस समस्या को और बढ़ाते हुए, इंजीनियरों को विमान के रडार सिस्टम और स्वदेशी 'अस्त्र' बियॉन्ड-विजुअल-रेंज मिसाइल के बीच सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन में बड़ी दिक्कतें आईं। इसके चलते फ्लाइट ट्रायल्स को फिर से शुरू करने से पहले काफी काम करना पड़ा।

IAF की घटती लड़ाकू ताकत

इस देरी की एक रणनीतिक कीमत है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वायुसेना के पास इस समय 42 स्क्वाड्रन की स्वीकृत ताकत के मुकाबले सिर्फ 29 फाइटर स्क्वाड्रन हैं। रक्षा योजनाकार इसे भारत के दो-मोर्चों वाले सुरक्षा माहौल को देखते हुए एक गंभीर ऑपरेशनल कमी बताते हैं।

वायुसेना ने हाल के सालों में पुराने मिग-21 वेरिएंट्स को बिना किसी सही रिप्लेसमेंट के रिटायर कर दिया है। इससे वह अपनी ताकत बनाए रखने के लिए सुखोई-30MKI और डसॉल्ट राफेल जैसे प्लेटफॉर्म पर ज्यादा निर्भर हो गई है।

IAF ने साफ कहा है कि वह ऐसे किसी भी विमान को स्वीकार नहीं करेगी जो सभी जरूरी ऑपरेशनल मानकों पर खरा नहीं उतरता। सूत्रों के मुताबिक, विमान को शामिल करने से पहले पूरी तरह सर्टिफिकेशन की वायुसेना की जिद पर कोई समझौता नहीं होगा।

स्वदेशी रडार

टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के मोर्चे पर, स्वदेशी रूप से विकसित 'उत्तम' AESA रडार के फ्लाइट ट्रायल्स तेजी से चल रहे हैं। तेजस-एमके1ए के मौजूदा प्रोडक्शन बैच में इजरायली Elta EL/M-2052 AESA रडार लगा है, जो एडवांस्ड टारगेट डिटेक्शन और ट्रैकिंग क्षमता देता है। हालांकि, भविष्य के प्रोडक्शन लॉट में 'उत्तम' सिस्टम पर स्विच करने की योजना है। रक्षा योजनाकार इस कदम को विदेशी एवियोनिक्स सप्लायर्स पर भारत की निर्भरता कम करने के लिए जरूरी मानते हैं। DRDO ने 'उत्तम' प्रोग्राम को एक एडवांस्ड स्टेज में बताया है, हालांकि इसे प्रोडक्शन एयरक्राफ्ट के साथ इंटीग्रेट करना अभी बाकी है।

तेजस का बड़ा रोडमैप

तेजस-एमके1ए एक बड़े और महत्वाकांक्षी रोडमैप का हिस्सा है। HAL इसके साथ-साथ तेजस-एमके2 भी विकसित कर रहा है, जो GE F414 इंजन से लैस एक भारी और ज्यादा काबिल वेरिएंट है। इसका मकसद मीडियम-वेट फाइटर की भूमिका को भरना है। इसके अलावा, IAF ने 97 और तेजस LCA Mk1A वेरिएंट का ऑर्डर दिया है, जिस पर भी काम चल रहा है।