Madhya Pradesh News : मध्य प्रदेश के 20 वर्षीय बिट्टू तबाही ने अकेले ही प्रदूषित अजनार नदी को साफ कर दिया। शुरुआती आलोचना के बावजूद, उन्होंने अपने दम पर नदी से कचरा हटाकर उसे पुनर्जीवित किया। उनके इस काम को आनंद महिंद्रा ने भी सराहा।

कहते हैं कि अगर इंसान कुछ ठान ले तो कुछ भी नामुमकिन नहीं। अब ऐसी ही एक मिसाल मध्य प्रदेश के 20 साल के एक लड़के ने पेश की है, जिसने अकेले दम पर एक पूरी नदी को साफ कर दिया। जी हां, मध्य प्रदेश के ब्यावरा के रहने वाले 20 साल के बिट्टू तबाही इन दिनों इंटरनेट पर छाए हुए हैं।

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उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने शेयर की लड़के की कहानी

अक्सर प्रेरणा देने वाले लोगों की कहानियां शेयर करने वाले उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने अब मध्य प्रदेश के इस लड़के की कहानी शेयर की है, जो वायरल हो गई है। इस लड़के का नाम बिट्टू तबाही है, जिसने मध्य प्रदेश की अजनार नदी को अकेले ही साफ कर दिया है।

सोशल मीडिया के लिए किया था ये काम

मध्य प्रदेश के ब्यावरा शहर के इस लड़के की शुरुआत में काफी आलोचना हुई। लोगों ने कहा कि वो सोशल मीडिया पर लाइक्स पाने के लिए नदी के कुछ हिस्सों की सफाई का दिखावा कर रहा है। इस पर आनंद महिंद्रा ने लिखा, "हम अक्सर शिकायत करते हैं कि सोशल मीडिया पर मतलब की चीजों से ज़्यादा फालतू चीजों को तवज्जो मिलती है। लेकिन अगर 'लाइक्स' की चाहत किसी अच्छे काम की वजह बन जाए तो इसमें गलत क्या है? ब्यावरा शहर के बिट्टू तबाही मेरी सोमवार की प्रेरणा हैं।"

कौन है ये बिट्टू तबाही?

मध्य प्रदेश के छोटे से शहर ब्यावरा के रहने वाले 20 साल के बिट्टू तबाही ने बहुत ज़्यादा गंदी हो चुकी अजनार नदी को साफ करने का बीड़ा उठाया। उन्होंने किसी सरकारी मदद या बड़े सपोर्ट का इंतज़ार नहीं किया और पूरी तरह से अपने दम पर नदी को साफ करने का फैसला किया। किसी बड़ी मशीन के बिना, सिर्फ अपने हाथों और कुछ मामूली औज़ारों से बिट्टू ने नदी से प्लास्टिक कचरा, काई और मलबा निकालना शुरू किया।

नेक काम पर भी लोगों ने उठाए थे सवाल

 इस काम के लिए शुरुआत में तारीफ नहीं मिली। लोगों ने ताने मारकर और शक की नज़र से देखकर उनका हौसला तोड़ने की कोशिश की। कई लोगों ने कहा कि यह काम एक अकेले इंसान के बस का नहीं है। कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि यह नदी अब कभी ठीक नहीं हो सकती। कई लोगों ने बिट्टू की नीयत पर सवाल उठाए और इसे मशहूर होने का स्टंट बताया। लेकिन बिट्टू ने इन सब तानों को अनसुना कर दिया और अपना पूरा ध्यान नदी साफ करने के अपने लक्ष्य पर लगाया।

26 जनवरी को की थी शुरूआत

बिट्टू ने 26 जनवरी को नदी की सफाई शुरू की और हफ्तों तक यह काम जारी रहा। शुरुआत में उन्हें जो थोड़ा-बहुत साथ मिला, वो भी बाद में खत्म हो गया। फिर भी, वो अकेले काम करते रहे। गंदे पानी में उतरकर उन्होंने प्लास्टिक की थैलियां, बोतलें और काई की मोटी परतें अपने हाथों से निकालीं। यह काम शारीरिक रूप से बहुत मुश्किल और थका देने वाला था, लेकिन उन्होंने सब्र और लगन से काम जारी रखा।

अब बिट्टू को असली हीरो कह रहे लोग

  • सफाई से पहले, नदी की हालत चिंताजनक थी। सतह पर तैरते कचरे के बड़े-बड़े ढेर थे और कई जगहों पर तो पानी तक नहीं दिखता था। नदी किसी प्राकृतिक जल स्रोत के बजाय कूड़ेदान जैसी लगती थी, जो सालों की लापरवाही और प्रदूषण का नतीजा था। लेकिन बिट्टू के काम के बाद जो बदलाव आया, उसने ऑनलाइन कई लोगों को हैरान कर दिया। धीरे-धीरे, जैसे ही कचरा हटा, नदी ने अपना प्राकृतिक रूप वापस पाना शुरू कर दिया। अब वहां का पानी साफ दिखता है और आसपास का माहौल भी ज़्यादा शांत लगता है। पहले और बाद की तस्वीरें और वीडियो देखकर लोगों को यकीन ही नहीं हो रहा कि यह वही जगह है।
  • तब से बिट्टू तबाही की जमकर तारीफ हो रही है। कई लोग बिट्टू को असली हीरो कह रहे हैं। बहुत से लोग कह रहे हैं कि वह सच में एक प्रेरणा हैं। बिट्टू की कोशिशें तारीफ के काबिल हैं, लेकिन यह हमें यह भी याद दिलाता है कि नदियों को बचाना और साफ रखना हम सभी की ज़िम्मेदारी है।