हैदराबाद की चंचलगुडा जेल ने 'फील द जेल' पहल शुरू की है। आम नागरिक ₹1,000-2,000 देकर 12-24 घंटे जेल जीवन का अनुभव कर सकते हैं, जिसका मकसद आजादी का महत्व समझाना है। एक जेल म्यूजियम भी खोला गया है।

हैदराबाद की चंचलगुडा सेंट्रल जेल ने एक बिल्कुल नया और अनोखा प्रोग्राम शुरू किया है। मंगलवार को लॉन्च हुए 'फील द जेल' नाम के इस प्रोग्राम में कोई भी आम नागरिक 12 या 24 घंटे के लिए जेल की जिंदगी का अनुभव कर सकता है। इस अनोखे एक्सपीरियंस में लोगों को खास तौर पर बनी जेल की कोठरियों में रखा जाएगा। उन्हें वही खाना मिलेगा जो कैदियों को मिलता है और कैदियों जैसा ही रूटीन फॉलो करना होगा। इसका मकसद लोगों को आजादी की कीमत और जेल की असलियत समझाना है।

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अधिकारियों के मुताबिक, 24 घंटे जेल में रहने के इस अनुभव के लिए 2,000 रुपये देने होंगे। वहीं, अगर कोई 12 घंटे का छोटा स्टे चुनता है, तो उसे 1,000 रुपये चुकाने होंगे।

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इसके साथ ही अधिकारियों ने एक नए जेल म्यूजियम का भी उद्घाटन किया। यह म्यूजियम निजाम के दौर से लेकर आज के मॉडर्न सुधार सिस्टम तक जेलों के सफर को दिखाता है। म्यूजियम में पुरानी बेड़ियां, वैसी की वैसी रखी गईं जेल की कोठरियां और भक्त रामदासु और दाशरथी कृष्णमाचार्युलु जैसे मशहूर कैदियों के दिलचस्प किस्से भी शामिल हैं।

यहां आने वाले लोग जेल के अंदर चलने वाले उद्योगों, कैदियों के सुधार के लिए बने प्रोग्राम्स और नागार्जुन सागर बांध के निर्माण में कैदियों के योगदान के बारे में भी जान सकते हैं। चंचलगुडा का यह म्यूजियम संगारेड्डी हेरिटेज प्रिजन म्यूजियम से प्रेरित है। संगारेड्डी जेल के 'एक दिन के जेल अनुभव' वाले प्रोग्राम ने भी पहले खूब सुर्खियां बटोरी थीं।

इस पहल का उद्घाटन तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने किया। उन्होंने चंचलगुडा के स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ करेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन (SICA) में बने इस नए जेल म्यूजियम को जनता के लिए खोला। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रोग्राम का मकसद कानून, अनुशासन और जेल सिस्टम के काम करने के तरीके के बारे में जागरूकता फैलाना है, खासकर युवाओं के बीच।

राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने जेलों को "सुधार और बदलाव का केंद्र" बताते हुए कहा कि एक प्रगतिशील समाज को सिर्फ सजा पर ही नहीं, बल्कि सुधार और दूसरा मौका देने पर भी ध्यान देना चाहिए। तेलंगाना जेल के अधिकारियों का कहना है कि चंचलगुडा की यह पहल जनता के लिए एक ज्यादा ऑर्गनाइज्ड और गहरा अनुभव देने के लिए बनाई गई है।

जेल डीजीपी सौम्या मिश्रा ने कहा, "यह पहल राज्य के सुधार कार्यक्रमों में एक नया अध्याय है। इससे जनता को जेल प्रशासन और कैदियों के पुनर्वास को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।"