IIT Bombay Student Death: आईआईटी बॉम्बे के छात्र की आत्महत्या मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने अब तक 20 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। छात्र का फोन लॉक होने से जांच में दिक्कत आ रही है। वहीं, परिवार के जातिगत भेदभाव के आरोपों पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने भी जांच शुरू कर दी है।
NCSC inquiry IIT Bombay: सूत्रों की मानें तो आईआईटी बॉम्बे सुसाइड केस में मुंबई क्राइम ब्रांच ने अब तक 20 लोगों के बयान दर्ज कर लिए हैं। इनमें संस्थान के कुछ छात्र और स्टाफ मेंबर्स शामिल हैं। पुलिस ने उन छात्रों से भी पूछताछ की है जो परीक्षा हॉल में मौजूद थे। इसके अलावा, परीक्षा की निगरानी कर रहे शिक्षकों और हॉस्टल स्टाफ के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
सूत्रों ने बताया कि प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का बयान अभी तक दर्ज नहीं हो पाया है। वहीं, मृतक छात्र के मोबाइल फोन में पैटर्न लॉक लगा है। इस वजह से पुलिस यह पता नहीं लगा पा रही है कि उसने किसे कॉल किया था या किसका कॉल आया था। हालांकि, फोन की स्क्रीन पर कई मिस्ड कॉल के नोटिफिकेशन जरूर दिख रहे हैं। गुरुवार को सूत्रों ने साफ किया कि पैटर्न लॉक की वजह से जांच टीम को फोन से ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है।
NCSC कर रहा जातिगत भेदभाव की जांच
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने गुरुवार को आईआईटी बॉम्बे का दौरा किया। उन्होंने अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से आने वाले बीटेक सेकंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या मामले में मौके पर जाकर जांच की।
दरअसल, छात्र के परिवार ने जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि मौत से पहले साहिल को परेशान किया गया था। फिलहाल मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
आईआईटी बॉम्बे का जवाब और मामले का बैकग्राउंड
इस बीच, आईआईटी बॉम्बे ने छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की मौत को लेकर पहले दिए गए अपने एक बयान पर औपचारिक रूप से माफी मांगी है।
बता दें कि आईआईटी बॉम्बे में बीटेक की पढ़ाई कर रहे 20 साल के साहिल रवींद्र वाकोडे ने 18 सितंबर को आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के बाद से ही पुलिस और क्राइम ब्रांच मामले की तह तक जाने में जुटी हैं।
