Joint Maritime Committee meeting: भारत और साइप्रस के बीच 2017 के मर्चेंट शिपिंग समझौते के तहत लिमासोल में पहली जॉइंट मैरीटाइम कमेटी (JMC) की बैठक हुई। इस दौरान समुद्री शिक्षा, निवेश और IMO में सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।

Limassol Shipping Agreement: भारत और साइप्रस के रिश्तों में एक बड़ा कदम उठाया गया है। साइप्रस के लिमासोल शहर में दोनों देशों के बीच पहली जॉइंट मैरीटाइम कमेटी (JMC) की बैठक हुई। निकोसिया में भारतीय उच्चायोग ने शनिवार को बताया कि इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) एस. वेंकटेशपति और साइप्रस के शिपिंग उप मंत्रालय के कार्यवाहक स्थायी सचिव थियोडौलोस मेसिमेरिस ने की।

भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इसे भारत-साइप्रस समुद्री सहयोग का नया अध्याय बताया। यह बैठक 29 सितंबर को हुई, जो 2017 के द्विपक्षीय मर्चेंट शिपिंग समझौते के तहत आयोजित की गई। नई दिल्ली से गए प्रतिनिधिमंडल में साइप्रस में भारत के उच्चायुक्त मनीष, निकोसिया मिशन के अधिकारी और समुद्री प्रशासन महानिदेशालय के उप महानिदेशक दीपेंद्र सिंह बिसेन शामिल थे। इस टीम ने 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक साइप्रस के अधिकारियों और शिपिंग इंडस्ट्री के दिग्गजों के साथ लंबी बातचीत की।

चर्चा के मुख्य मुद्दे

बातचीत के दौरान समुद्री शिक्षा और ट्रेनिंग, दोनों सेक्टर्स में निवेश के मौके, नीतियों और रणनीतियों के आदान-प्रदान पर जोर दिया गया। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) में आपसी हितों को लेकर सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

संस्थागत संबंधों को मजबूती

भारतीय टीम ने साइप्रस शिपिंग चैंबर, प्रमुख समुद्री कंपनियों, साइप्रस पोर्ट्स अथॉरिटी और साइप्रस मरीन एंड मैरीटाइम इंस्टीट्यूट के साथ भी खास बैठकें कीं। साथ ही, लिमासोल बंदरगाह का दौरा भी किया। उच्चायोग के मुताबिक, इस दौरान समुद्री सेवाओं, शिपिंग फाइनेंस, जहाजों की मरम्मत और रीसाइक्लिंग, नाविकों की ट्रेनिंग और ग्रीन शिपिंग जैसे क्षेत्रों में संभावनाओं की तलाश की गई।

भविष्य की योजनाएं

दोनों देशों ने भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की। साइप्रस के शिपिंग उप मंत्री जल्द ही एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत का दौरा करेंगे। इसके अलावा, नवंबर 2026 में मुंबई में एक बड़ा मैरीटाइम बिजनेस फोरम होने वाला है, जिसका मकसद जॉइंट वेंचर और निवेश को बढ़ावा देना है।

उच्चायोग ने बताया कि यह बैठक भारत-साइप्रस जॉइंट एक्शन प्लान का हिस्सा है। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के आपसी सहयोग को और गहरा करने के विजन को दिखाती है।

ये रणनीतिक कदम दिखाते हैं कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक और आर्थिक बातचीत में कितनी तेजी आई है।