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दुनिया देखती रह गई: भारत बना नंबर-2, गांवों तक पहुंची हाई-टेक स्ट्रोक एम्बुलेंस, जानिए पूरी डिटेल

Breaking Health Innovation: भारत ने ग्रामीण हेल्थकेयर के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं से जोड़कर भारत दुनिया का दूसरा देश बन गया है। यह पहल असम और पूर्वोत्तर के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है।

3 Min read
Author : Surya Prakash Tripathi
Published : Jan 22 2026, 01:14 PM IST
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Image Credit : ChatGPT

Mobile Rural Stroke Unit India: भारत ने ग्रामीण इलाकों में स्ट्रोक इलाज की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब स्ट्रोक जैसे जानलेवा रोग में मरीज़ को अस्पताल तक पहुंचने का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि इलाज खुद उसके दरवाज़े तक पहुंचेगा। यही वजह है कि भारत दुनिया का दूसरा देश बन गया है जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं से सफलतापूर्वक जोड़ा है।

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Image Credit : X

क्या है मोबाइल स्ट्रोक यूनिट और क्यों है यह गेमचेंजर?

मोबाइल स्ट्रोक यूनिट असल में पहियों पर चलता एक छोटा अस्पताल है। इसमें सीटी स्कैन मशीन, ज़रूरी जांच की लैब, क्लॉट तोड़ने वाली दवाएं और वीडियो कॉल के ज़रिये न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह की सुविधा मौजूद होती है। आसान भाषा में कहें तो, अब स्ट्रोक का मरीज़ घर पर ही जांच और इलाज पा सकता है। ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में अस्पताल तक पहुंचने में कई घंटे लग जाते हैं। यही देरी अक्सर जान जाने या ज़िंदगी भर की विकलांगता की वजह बनती है। मोबाइल स्ट्रोक यूनिट इसी देरी को खत्म करती है।

#HealthForAll

.@ICMRDELHI hands over Mobile Stroke Unit to Government of Assam, bringing Life-Saving Stroke Care closer to homes in rural, remote and difficult terrain

India is the second country globally to report successful integration of an MSU with emergency medical… pic.twitter.com/Yeqh0nafIJ

— Ministry of Health (@MoHFW_INDIA) January 22, 2026

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स्ट्रोक में हर मिनट क्यों होता है इतना खतरनाक?

डॉक्टरों के मुताबिक, स्ट्रोक के दौरान हर मिनट लगभग 1.9 बिलियन मस्तिष्क कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। अगर इलाज देर से मिले, तो मरीज़ की जान बचना मुश्किल हो जाता है या वह हमेशा के लिए अपंग हो सकता है। मोबाइल स्ट्रोक यूनिट ने इलाज का समय करीब 24 घंटे से घटाकर सिर्फ 2 घंटे कर दिया है। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने ऐसी दो मोबाइल स्ट्रोक यूनिट असम सरकार को सौंपी हैं।

असम से शुरुआत, लेकिन असर पूरे देश पर?

पूर्वोत्तर भारत में खराब सड़कें, लंबी दूरी और मुश्किल भौगोलिक हालात हमेशा से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती रहे हैं। 108 इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवा से जुड़ने के बाद इन यूनिट्स की पहुंच 100 किमी. तक हो गई है। यानी अब दूर-दराज़ के गांवों तक भी तेज़ इलाज संभव है।

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क्या आंकड़े भी इस मॉडल की सफलता बताते हैं?

हां, और बेहद साफ़ तरीके से। 2021 से अगस्त 2024 के बीच इन मोबाइल स्ट्रोक यूनिट्स ने 2,300 से ज़्यादा इमरजेंसी कॉल संभालीं। करीब 294 संदिग्ध स्ट्रोक मामलों की जांच हुई और लगभग 90% मरीज़ों का इलाज उनके घर से ही किया गया।

क्या भारत अब स्ट्रोक के इलाज में दुनिया को रास्ता दिखाएगा?

नतीजा यह रहा कि मौतों में करीब एक-तिहाई की कमी आई और लंबे समय की विकलांगता आठ गुना तक घट गई। ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल के अनुसार, मोबाइल स्ट्रोक यूनिट पहले जर्मनी में शुरू हुई थीं और बड़े शहरों में आज़माई गईं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में इन्हें इमरजेंसी सेवाओं से जोड़कर लागू करने में भारत ने दुनिया में दूसरी बड़ी सफलता दर्ज की है। यह अनुभव अब दूसरे देशों के लिए भी मिसाल बन सकता है।

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आगे क्या? क्या यह सुविधा पूरे देश में पहुंचेगी?

असम सरकार का कहना है कि अब यह सेवा राज्य के स्वामित्व में होगी, जिससे इसकी निरंतरता बनी रहेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह मॉडल दूसरे राज्यों में भी अपनाया गया, तो भारत में स्ट्रोक से होने वाली मौत और विकलांगता में बड़ी गिरावट आ सकती है। मोबाइल स्ट्रोक यूनिट सिर्फ एक एम्बुलेंस नहीं, बल्कि समय पर इलाज का भरोसा है। यह मॉडल दिखाता है कि अगर तकनीक और सही योजना साथ आए, तो गांव और शहर के इलाज के फर्क को भी मिटाया जा सकता है।

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About the Author

SP
Surya Prakash Tripathi
सूर्य प्रकाश त्रिपाठी। 20 जुलाई 2003 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत। कुल 22 साल का अनुभव। 19 फरवरी 2024 से एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में परास्नातक की डिग्री के साथ इन्होंने डबल MA LLB भी किया हुआ है। इन्होंने क्राइम, धर्म और राजनीति के साथ सामाजिक मुद्दों पर लिखने की रुचि है। हिंदी दैनिक आज, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, अमर उजाला, दैनिक भास्कर डिजिटल (DB DIGITAL) जैसे मीडिया संस्थानों में भी सूर्या सेवाएं दे चुके हैं।
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