Monsoon and Agriculture: भारत में इस साल मानसून की विदाई 12% कम बारिश के साथ हुई है। देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात हैं, जबकि कुछ राज्यों में सामान्य से ज्यादा पानी बरसा है। इसका सीधा असर अब खेती और भूजल स्तर पर पड़ रहा है।

India Rainfall 2026: भारत में 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम बारिश के साथ खत्म हो गया। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 29 सितंबर के बीच देश में 758.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 865 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। यानी पूरे मानसून सीजन में बारिश सामान्य से 12 फीसदी कम रही।

हालांकि, देश का औसत आंकड़ा पूरी तस्वीर नहीं बताता। अलग-अलग क्षेत्रों और राज्यों में बारिश का अंतर काफी बड़ा रहा। कहीं सामान्य से ज्यादा बारिश हुई तो कई राज्यों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई।

पूर्व और पूर्वोत्तर भारत सबसे ज्यादा प्रभावित

2026 के मानसून में पूर्व और पूर्वोत्तर भारत की स्थिति सबसे चिंताजनक रही। इस क्षेत्र में सामान्य 1,361.2 मिलीमीटर के मुकाबले सिर्फ 1,016.3 मिलीमीटर बारिश हुई। यानी यहां बारिश में करीब 25 फीसदी की कमी रही।

मेघालय सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में रहा। यहां सामान्य 2,681.6 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले सिर्फ 1,075.9 मिलीमीटर पानी बरसा। इस तरह राज्य में सामान्य से करीब 60 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, असम और बिहार में भी मानसून के दौरान बारिश की भारी कमी रही।

उत्तर-पश्चिम भारत में कहीं राहत, कहीं कमी

उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश सामान्य से करीब 6 फीसदी कम रही। हालांकि, इस क्षेत्र के राज्यों के बीच भी बड़ा अंतर देखने को मिला। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई। दूसरी ओर हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में बारिश कम रही। पंजाब में सामान्य से करीब 41 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।

मध्य भारत में बारिश सामान्य के करीब

मध्य भारत में मानसून का प्रदर्शन देश के अन्य हिस्सों की तुलना में बेहतर रहा। यहां सामान्य 974.7 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले 952.3 मिलीमीटर पानी बरसा। यानी कमी मामूली रही।

हालांकि, क्षेत्र के राज्यों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा। ओडिशा में सामान्य से 30 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। वहीं दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। दूसरी तरफ गोवा और महाराष्ट्र में बारिश सामान्य से नीचे रही।

दक्षिण भारत में मानसून सबसे कमजोर

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में मानसून सबसे कमजोर रहा। इस क्षेत्र में सामान्य 710 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले सिर्फ 539 मिलीमीटर पानी बरसा। यानी यहां 24 फीसदी की कमी दर्ज की गई।

केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और पुडुचेरी में बारिश सामान्य से कम रही। कर्नाटक और पुडुचेरी इस क्षेत्र के सबसे प्रभावित इलाकों में रहे। 29 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां और कमजोर हो गईं। उस दिन देश में सामान्य 3.7 मिलीमीटर के मुकाबले सिर्फ 1.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

खेती और भूजल पर बढ़ा दबाव

कम और असमान बारिश का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहा। कई इलाकों में बारिश की कमी और देरी से खेती प्रभावित हुई। इससे बुवाई के पैटर्न में बदलाव आया और दालों तथा मोटे अनाज की खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ीं।

भारत का करीब 55 से 60 फीसदी कृषि क्षेत्र सिंचाई के बजाय बारिश पर निर्भर है। ऐसे में मानसून की कमी का सीधा असर कृषि गतिविधियों पर पड़ सकता है। बारिश कम होने से सिंचाई के लिए भूजल पर निर्भरता भी बढ़ी। जिन इलाकों में पहले से पानी की कमी है, वहां भूजल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिला।

अल नीनो ने भी बदला मानसून का मिजाज

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में बने अल नीनो का असर मानसून के प्रदर्शन पर पड़ा और देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का असंतुलन बढ़ा। IMD के वर्गीकरण के अनुसार, देश का करीब 53 फीसदी भौगोलिक क्षेत्र सामान्य बारिश की श्रेणी में रहा, जबकि करीब 39 फीसदी हिस्से में कम बारिश दर्ज की गई।

इस तरह 2026 का मानसून सिर्फ कम बारिश के लिए नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की बड़ी असमानता के लिए भी याद किया जाएगा। आने वाले समय में इसका असर खेती, भूजल और जल प्रबंधन की योजनाओं पर भी दिखाई दे सकता है।