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Ajit Pawar Crash: 10 प्लेन-हेली क्रैश से कांप गया देश, चंद पल में राख हो गया अजित पवार का जेट
Famous Indian Leaders Plane Crash : बारामती में प्लेन क्रैश में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन हो गया। भारत में हुए बड़े विमान और हेलीकॉप्टर हादसों की सूची, जिनमें अजित पवार, विजय रूपाणी, बिपिन रावत समेत कई दिग्गज नेताओं की जान गई।

आसमान में टूटीं कई उम्मीदें: जब विमान हादसों ने छीन लिए भारत के बड़े चेहरे
बारामती में हुए विमान हादसे ने महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश को झकझोर दिया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौत की पुष्टि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने की है। लैंडिंग के दौरान हुए इस क्रैश में विमान में सवार सभी लोग मृत पाए गए। यह हादसा एक बार फिर उस कड़वी सच्चाई की याद दिलाता है कि आधुनिक तकनीक के बावजूद आसमान में सफर हमेशा जोखिम से मुक्त नहीं रहा।
भारत के राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में ऐसे कई मौके आए हैं, जब विमान या हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं ने देश को अपूरणीय क्षति पहुंचाई। आइए, उन प्रमुख हस्तियों पर नज़र डालते हैं, जिनकी मौत ऐसे ही हादसों में हुई और जिनका जाना सिर्फ परिवारों के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए भी एक गहरा आघात था।
महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार (2026)
बारामती में लैंडिंग के दौरान हुए प्लेन क्रैश में अजित पवार का निधन हो गया। DGCA के मुताबिक, विमान में सवार सभी लोग मृत पाए गए। इस हादसे में एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार के साथ अन्य यात्री और क्रू मेंबर्स भी शामिल थे। दशकों तक सत्ता के केंद्र में रहने वाले नेता का यूं अचानक जाना महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बड़ा झटका है।
पूर्व गुजरात मुख्यमंत्री विजय रूपाणी (2025)
एयर इंडिया ड्रीमलाइनर (बोइंग 787) के टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश होने से 240 से अधिक लोगों की मौत हुई। इस भीषण हादसे में पूर्व गुजरात मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे। यह दुर्घटना हाल के वर्षों की सबसे भयावह विमान दुर्घटनाओं में गिनी जाती है और भारतीय विमानन इतिहास में एक काला अध्याय मानी जाती है।
जनरल बिपिन रावत (2021)
भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत की मौत ने देश को स्तब्ध कर दिया था। तमिलनाडु के कुन्नूर के पास Mi-17 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें उनकी पत्नी समेत 13 लोगों की जान चली गई। यह हादसा सशस्त्र बलों और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रतिष्ठान के लिए गहरा आघात था।
दोरजी खांडू (2011)
अरुणाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दोरजी खांडू की मौत तवांग और ईटानगर के बीच हुए हेलीकॉप्टर क्रैश में हुई। उनके साथ चार अन्य लोग भी मारे गए। यह दुर्घटना दुर्गम पहाड़ी इलाकों में हवाई यात्रा की चुनौतियों को उजागर करती है।
वाई.एस. राजशेखर रेड्डी (2009)
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी का हेलीकॉप्टर नल्लमाला के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। खराब मौसम को हादसे की बड़ी वजह माना गया। उनका निधन राज्य की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा गया।
ओ.पी. जिंदल और सुरेंद्र सिंह (2005)
उद्योगपति ओ.पी. जिंदल और हरियाणा सरकार में मंत्री सुरेंद्र सिंह की मौत सहारनपुर के पास हुए हेलीकॉप्टर क्रैश में हुई। यह हादसा राजनीति और उद्योग—दोनों क्षेत्रों के लिए बड़ा नुकसान था।
संजय गांधी (1980)
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी की मौत दिल्ली में एक छोटे विमान को उड़ाते समय हुई। यह दुर्घटना भारतीय राजनीति की दिशा को प्रभावित करने वाली घटनाओं में गिनी जाती है।
माधवराव सिंधिया (2001)
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री माधवराव सिंधिया की मौत उत्तर प्रदेश में हुए एक निजी विमान हादसे में हुई। विमानन मंत्रालय संभाल चुके नेता का इस तरह जाना एक त्रासदी के रूप में देखा गया।
वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा (24 जनवरी 1966)
भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी भाभा की मौत एयर इंडिया फ्लाइट 101 के स्विस आल्प्स में क्रैश होने से हुई। जांच में एटीसी कम्युनिकेशन फेलियर को हादसे की बड़ी वजह माना गया। यह भारत के वैज्ञानिक इतिहास की सबसे बड़ी क्षति थी।
अभिनेत्री सौंदर्या (17 अप्रैल 2004)
दक्षिण भारतीय सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री सौंदर्या की मौत बेंगलुरु-करीमनगर की निजी उड़ान के क्रैश में हुई। इस हादसे में उनके भाई की भी मौत हो गई। यह घटना फिल्म इंडस्ट्री के लिए गहरे सदमे के रूप में याद की जाती है।
हर हादसा, एक सबक
इन सभी घटनाओं ने बार-बार यह सवाल उठाया है कि VIP यात्राओं, मौसम आकलन, तकनीकी जांच और सुरक्षा प्रोटोकॉल कितने प्रभावी हैं। हर हादसे के बाद नियम कड़े होते हैं, जांच बैठती है—लेकिन जानें लौटकर नहीं आतीं।
अजित पवार की मौत के साथ यह सूची एक और नाम से लंबी हो गई है। ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि वे कहानियां हैं, जिनमें नेतृत्व, जिम्मेदारी और राष्ट्र की उम्मीदें दफन हो गईं। आसमान में सफर जितना तेज़ और सुविधाजनक हुआ है, उतना ही जरूरी है कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए—ताकि यह सूची आगे न बढ़े।
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