इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता के भूकंप से कांपी धरती! समुद्र का पानी पीछे हटते ही मंडराया सुनामी का खतरा... फ्लोरेस द्वीप में आखिर ऐसा क्या हुआ कि लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर भागने लगे? क्या 2004 का खौफनाक इतिहास खुद को दोहराने वाला है?

Indonesia Earthquake: शनिवार की शांत सुबह पूर्वी इंडोनेशिया के निवासियों के लिए एक भयानक दुस्वप्न बनकर आई। US जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) और इंडोनेशियाई अधिकारियों के अनुसार, देश के पूर्वी नुसा तेंगारा क्षेत्र में स्थित फ्लोरेस द्वीप के पास 7.7 की ज़बरदस्त तीव्रता का भूकंप आया। इस कम गहराई वाले भूकंप का केंद्र द्वीप के उत्तरी तट पर बसे एंडे (Ende) शहर से लगभग 68 किलोमीटर (42 मील) उत्तर-पश्चिम में था। भूकंप इतना शक्तिशाली था कि झटके लगते ही चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और सैकड़ों लोग बदहवास होकर अपने घरों व इमारतों से बाहर भागने लगे।

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अस्पताल में मची अफ़रा-तफ़री: जब दीवारों में आने लगीं दरारें

भूकंप के इस तेज़ झटके ने हर तरफ डर का माहौल बना दिया। अस्पताल में तैनात 31 वर्षीय कस्टमर सर्विस अधिकारी लुकास लोटार ने उस भयावह मंजर को याद करते हुए AFP को बताया, *"अचानक सब कुछ हिलने लगा और मैं घबरा गया। मरीज़ भी अपनी जान बचाने के लिए अस्पताल से बाहर भागने लगे। झटका इतना ज़ोरदार था कि मैंने इमारत की दीवारों में दरारें आते देखीं।" शुरुआती झटके के तुरंत बाद उसी इलाके में कई शक्तिशाली आफ्टरशॉक्स (बाद के झटके) महसूस किए गए, जिनमें से एक झटका 6.1 की तीव्रता का दर्ज किया गया।

समुद्र का पीछे हटना: क्या आने वाली है कोई बड़ी तबाही?

इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भू-भौतिकी एजेंसी (BMKG) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सुनामी की चेतावनी जारी की। BMKG के भूकंप और सुनामी निदेशक विजयांतो के अनुसार, सुनामी मॉडलिंग के नतीजों से संकेत मिला है कि इस भूकंप में पूर्वी नुसा तेंगारा, दक्षिण सुलावेसी और पश्चिमी नुसा तेंगारा प्रांतों में 0.5 मीटर से 3 मीटर (9.8 फीट) तक ऊंची सुनामी लहरें पैदा करने की क्षमता है। फ्लोरेस द्वीप के मौमेरे (Maumere) शहर में देखा गया कि तटीय इलाकों से समुद्र का पानी पीछे हटने लगा है, जो सुनामी आने से ठीक पहले का एक अत्यंत चिंताजनक और खतरनाक संकेत माना जाता है।

सड़कों पर लोगों का हुजूम: सुरक्षित ऊंचाइयों की ओर दौड़ते कदम

सुनामी की आहट मिलते ही तटीय इलाकों में रहने वाले सैकड़ों लोगों को तुरंत ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के निर्देश दिए गए। इंडोनेशियाई टेलीविज़न पर प्रसारित दृश्यों में नागेकेओ (Nagekeo) इलाके के निवासियों को अपने परिवारों के साथ सुरक्षित जगहों की ओर भागते हुए देखा गया। कई इमारतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि अधिकारियों ने अभी तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन तटीय क्षेत्रों में 19 से 30 सेंटीमीटर तक की शुरुआती सुनामी लहरें देखी गई हैं।

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'रिंग ऑफ़ फ़ायर' का काला इतिहास: क्या खुद को दोहराएगी पुरानी त्रासदी?

इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के कुख्यात "रिंग ऑफ़ फ़ायर" (Ring of Fire) क्षेत्र में स्थित है, जहां अक्सर विनाशकारी भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियां होती रहती हैं। यह इलाका 2004 की उस भयावह आपदा की याद दिलाता है जब 9.1 तीव्रता के भूकंप के बाद आई सुनामी ने पूरे क्षेत्र में 2,20,000 से अधिक लोगों की जान ले ली थी। इसके अलावा, 2018 में लोम्बोक द्वीप पर आए भूकंप में 550 लोगों की मौत हुई थी और उसी साल सुलावेसी द्वीप के पालु में 7.5 तीव्रता के भूकंप और सुनामी के कारण 4,300 से अधिक लोग मारे गए या लापता हो गए थे। वर्तमान में सभी आपातकालीन रिस्पॉन्स टीमें हाई अलर्ट पर हैं और स्थिति पर पैनी नज़र रखी जा रही है।

क्यों बार-बार कांपती है इंडोनेशिया की धरती?

इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ में स्थित है। यह दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है, जो जापान से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया और प्रशांत महासागर के आसपास तक फैला हुआ है। टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में लगातार भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं। इसी वजह से इंडोनेशिया का इतिहास कई विनाशकारी भूकंपों और सुनामी का गवाह रहा है। सबसे भयावह घटनाओं में 26 दिसंबर 2004 को सुमात्रा के तट के पास आया 9.1 तीव्रता का भूकंप शामिल है। इसके बाद आई सुनामी ने पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में करीब 2.2 लाख लोगों की जान ले ली थी, जिनमें लगभग 1.7 लाख लोग इंडोनेशिया के थे।

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2018 की तबाही भी नहीं भूले लोग

साल 2018 में लोम्बोक द्वीप पर आए शक्तिशाली भूकंप के बाद कई हफ्तों तक आफ्टरशॉक्स का सिलसिला चलता रहा था। इस आपदा में लोम्बोक और पड़ोसी सुम्बावा में 550 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इसी साल बाद में सुलावेसी द्वीप के पालु में 7.5 तीव्रता का भूकंप आया। इसके बाद आई सुनामी ने भारी तबाही मचाई और 4,300 से ज्यादा लोग मारे गए या लापता हो गए। फिलहाल 7.7 तीव्रता के ताजा भूकंप के बाद अधिकारियों की नजर आफ्टरशॉक्स और समुद्री गतिविधियों पर बनी हुई है। शुरुआती तौर पर किसी बड़ी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुनामी की आशंका, समुद्र के पीछे हटने और लगातार आ रहे झटकों ने फ्लोरेस द्वीप और आसपास के इलाकों में खतरे की चिंता जरूर बढ़ा दी है।