Indus Water Treaty 2026: सिंधु जल संधि को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद फिर तेज हो गया है। पाकिस्तान के मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने संधि को कानूनी रूप से बाध्यकारी बताते हुए भारत के फैसले पर सवाल उठाया और 24 करोड़ पाकिस्तानी नागरिकों के पानी के अधिकार का हवाला दिया।
India Pakistan Water Dispute: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद एक बार फिर चर्चा में है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने भारत के उस फैसले पर सवाल उठाया है, जिसके तहत अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को स्थगित करने का ऐलान किया था। पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है और अब तरार ने 24 करोड़ पाकिस्तानी नागरिकों के पानी के अधिकार का हवाला दिया है।
पाकिस्तान ने संधि को बताया कानूनी रूप से बाध्यकारी
अत्ताउल्लाह तरार ने एक कार्यक्रम में कहा कि सिंधु जल संधि कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता है। उनके मुताबिक कोई एक पक्ष अपनी इच्छा से इस समझौते को बदल, रद्द या स्थगित नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विवाद होने की स्थिति में भी संधि में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।
पाकिस्तान की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब इस्लामाबाद लगातार सिंधु नदी के पानी को लेकर भारत के फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहा है।
24 करोड़ लोगों के पानी का दिया हवाला
तरार ने कहा कि सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान के करोड़ों लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत पर पानी को राजनीतिक या रणनीतिक दबाव के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उठाता रहेगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी हाल में संयुक्त राष्ट्र महासभा में सिंधु जल संधि का मुद्दा उठा चुके हैं।
1960 में हुई थी सिंधु जल संधि
सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान ने 19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षर किए थे। विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई इस संधि के तहत सिंधु नदी तंत्र की छह नदियों के पानी के इस्तेमाल का ढांचा तय किया गया। इसमें सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान के लिए और रावी, ब्यास तथा सतलुज जैसी पूर्वी नदियों का पानी भारत के लिए निर्धारित किया गया।
पहलगाम हमले के बाद बदला भारत का रुख
अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने की घोषणा की थी। भारत ने आतंकवाद और सामान्य संबंधों को साथ-साथ नहीं चलने देने की नीति पर जोर दिया था। इसके बाद से पाकिस्तान लगातार इस फैसले का विरोध कर रहा है।
दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर कानूनी और कूटनीतिक मतभेद भी बने हुए हैं। फिलहाल पाकिस्तान संधि को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना पक्ष रख रहा है, जबकि भारत ने आतंकवाद के मुद्दे को अपने रुख का प्रमुख आधार बताया है।
