Mojtaba Khamenei Military Reshuffle: ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने सेना और IRGC समेत कई अहम सैन्य पदों पर बड़े बदलाव किए हैं। अहमद वहीदी को IRGC कमांडर बनाया गया है। जानिए नए सैन्य चेहरों की नियुक्ति और इसके पीछे छिपे संकेत।

ईरान में सत्ता संभालने के कुछ ही महीनों बाद सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने देश की सैन्य और सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC, IRGC नेवी और बसीज फोर्स समेत कई अहम पदों पर नए चेहरों की नियुक्ति की गई है। ऐसे समय में जब ईरान बाहरी सैन्य दबाव और क्षेत्रीय तनाव का सामना कर रहा है, इस फेरबदल को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एक साथ इतने वरिष्ठ सैन्य पदों पर बदलाव से यह संकेत मिलता है कि नई ईरानी नेतृत्व व्यवस्था कमान और सुरक्षा ढांचे को अपने हिसाब से दोबारा व्यवस्थित करना चाहती है। खास बात यह है कि नई नियुक्तियों में कई ऐसे अधिकारी हैं जिनका लंबा सैन्य और सुरक्षा अनुभव रहा है।

सेना की कमान में कौन-कौन आया?

मुज्तबा खामेनेई ने मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही को ईरान की सशस्त्र सेनाओं के चीफ ऑफ स्टाफ की जिम्मेदारी दी है। उनके साथ ब्रिगेडियर जनरल कियूमर्स हेदरी को डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया है। अब्दोल्लाही का संबंध पहले IRGC से रहा है और वह सैन्य पृष्ठभूमि के अनुभवी अधिकारी हैं। यूरोपीय संघ के रिकॉर्ड में अली अब्दोल्लाही अलीआबादी को ईरानी सैन्य ढांचे में महत्वपूर्ण कमान से जोड़ा गया है।

यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान की सेना और IRGC दोनों को एक साथ प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए शीर्ष स्तर पर मजबूत समन्वय जरूरी है। ताजा रिपोर्टों में सैन्य कमान के ढांचे को और अधिक एकीकृत करने की कोशिशों का भी उल्लेख है।

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IRGC में भी बदला बड़ा चेहरा

ईरान के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठनों में से एक IRGC में भी नेतृत्व परिवर्तन किया गया है। ब्रिगेडियर जनरल अहमद वहीदी को मेजर जनरल के पद पर प्रमोट कर IRGC का नया कमांडर-इन-चीफ बनाया गया है। वहीदी लंबे समय से ईरान के सुरक्षा और सैन्य ढांचे में प्रभावशाली नाम रहे हैं। यूरोपीय संघ के रिकॉर्ड के मुताबिक उन्होंने IRGC में लंबे समय तक वरिष्ठ जिम्मेदारियां संभाली हैं और पहले कुद्स फोर्स के कमांडर भी रहे हैं।

इसके अलावा मेजर जनरल मुस्तफा इजादी को IRGC का डिप्टी कमांडर और रियर एडमिरल अली अजमाई को IRGC नेवी की कमान सौंपी गई है। वहीं हुसैन ताएब को बसीज रेजिस्टेंस फोर्स का प्रमुख बनाया गया है। इन नियुक्तियों से ईरान की सैन्य व्यवस्था के लगभग हर महत्वपूर्ण हिस्से में कमान का पुनर्गठन दिखाई देता है।

मोहसिन रेजाई की वापसी क्यों अहम?

सैन्य नियुक्तियों से पहले पूर्व IRGC कमांडर मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में मुज्तबा खामेनेई का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। रेजाई लंबे सैन्य अनुभव वाले नेता हैं और ईरान-इराक युद्ध के दौर में IRGC के शुरुआती प्रमुख कमांडरों में शामिल रहे हैं।

उनकी नियुक्ति को ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में अनुभवी सैन्य नेतृत्व को ज्यादा महत्व देने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, रेजाई की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण कूटनीतिक माहौल बना हुआ है।

मुज्तबा खामेनेई का संदेश क्या है?

सैन्य और सुरक्षा ढांचे में एक साथ हुए ये बदलाव केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं माने जा रहे हैं। मौजूदा परिस्थितियों में यह मुज्तबा खामेनेई की सुरक्षा और सैन्य कमान पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कई विश्लेषणों में नए नेतृत्व को अपेक्षाकृत कठोर रुख और सैन्य अनुभव से जोड़कर देखा गया है।

इस बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मुज्तबा खामेनेई की सेहत को लेकर चल रही अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम लीडर पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनके साथ बैठक अच्छी रही। यानी एक तरफ ईरान अपने सैन्य ढांचे को नए सिरे से व्यवस्थित कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ नेतृत्व की ओर से यह संदेश दिया जा रहा है कि शीर्ष सत्ता स्थिर है। आने वाले दिनों में इन नियुक्तियों का असर ईरान की सैन्य रणनीति, अमेरिका के साथ बातचीत और क्षेत्रीय तनाव पर कितना पड़ता है, इस पर दुनिया की नजर रहेगी।

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