Iran US Talks Suspended: स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में चल रही अमेरिका-ईरान वार्ता ट्रंप की चेतावनी के बाद बाधित हो गई। ईरान ने कड़ा जवाब देते हुए हर संभावित हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही।

अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में चल रही दोनों देशों की वार्ता ऐसे समय बाधित हो गई है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक रिश्तों को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जा रही थी। इस घटनाक्रम की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान माना जा रहा है, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता स्थल से निकल गया। इससे दोनों देशों के बीच जारी संवाद प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर बातचीत पूरी तरह खत्म होने की पुष्टि नहीं की गई है।

80 मिनट चली बातचीत, परमाणु कार्यक्रम पर नहीं हुई चर्चा

रिपोर्ट्स के अनुसार, ज्यूरिख में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत करीब 80 मिनट तक चली। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच परमाणु कार्यक्रम पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई। वार्ता का मुख्य फोकस पहले से मौजूद समझौतों को लागू करने और लेबनान की मौजूदा स्थिति पर विचार-विमर्श रहा।

बताया जा रहा है कि इस बातचीत में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, ट्रंप के बयान के बाद वार्ता को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, जिससे आगे की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

अमेरिकी धमकी पर ईरान का पलटवार

ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद गालिबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने अमेरिका को अपने बयानों में सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि ईरानी सेना हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है।

दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान को लेबनान में सक्रिय अपने सहयोगी समूहों को रोकना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका पहले से अधिक कठोर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

ऐसे बयानों से पहले से ही संवेदनशील क्षेत्रीय हालात और जटिल हो सकते हैं। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ज्यूरिख वार्ता दोबारा शुरू होती है या नहीं और दोनों देश कूटनीतिक रास्ते पर आगे बढ़ते हैं या तनाव और बढ़ता है। मध्य पूर्व की स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से यह वार्ता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों की अगली रणनीति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की करीबी नजर बनी रहेगी।